रांची। झारखंड में इस साल बारिश कम हुई है। आइएमडी के आंकड़ों के अनुसार इस साल अभी तक राज्य में सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं राज्य के 15 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। दो जिलों (गढ़वा और पलामू) की स्थिति काफी दयनीय है। झारखंड में मात्र लगभग 10 प्रतिशत खेती के क्षेत्र ही सिंचित हैं। इसका सीधा प्रभाव राज्य की प्रमुख खरीफ फसल धान पर पड़ा है। झारखंड भयंकर सुखाड़ की चपेट में है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को तुरंत राहत पैकेज देना चाहिए। यहे बातें झारखंड जनाधिकार महासभा ने फिल्ड विजिट के बाद जारी रिपोर्ट में कही हैं।
कोल्हान के तीन जिलों में सामान्य से कम बारिश
महासभा के अंबिका यादव, दिनेश मुर्मू और रोज खाखा ने जारी रिपोर्ट में कहा कि राज्य के लगभग सभी जिलों में मानसून के शुरूआती दिनों में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई। इसलिए जिन जिलों में बाद में सामान्य बारिश हुई भी (जैसे पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सराईकेला-खरसावां आदि), वहां भी स्थिति गंभीर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल लगभग कम धान बुआई हुई है। झारखंड के अधिकांश किसान छोटी जोत वाले हैं जो फसल के लिए वर्षा पर पूरी तरह निर्भर हैं। कई किसान तो अपने खाने भर का धान भी नहीं उगा पाते हैं। ऐसी सुखाड़ के हालत में राज्य में व्यापक खाद्य संकट की संभावना है।