पिछले कुछ सालों से झारखंड मे 1932 के खतियान को लागू करने की बात की जा रही है। झारखंड सरकार के मंत्री और विधायक भी खातियान आधारित स्थानीय नीति बनाने की बात कहते नजर आ रहे थे अब बुधवार को हेमंत साेरेन सरकार के कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर चर्चा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक 1932 खतियान को लागू करने का कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन सरकार कानूनी दांव पेच समझने के बाद ही कोई प्रस्ताव लाएगी। ऐसा कोई प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में अंतिम समय में ही आ सकेगा।
बता दें 5 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र मे कहा था की हम 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाने जा रहे हैं।
24 प्रस्तावों को मंजूरी दे सकती है सरकार
बुधवार को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार दो दर्जन के करीब प्रस्ताव स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा माना जा रहा है कि सरकार पुख्ता तैयारी के साथ कैबिनेट में स्थानीय नीति का प्रस्ताव लाएगी। इसके पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं 1932 के आधार को लेकर शंका भी जता चुके हैं। विधानसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर 1932 का खतियान लागू हुआ तो मामला कोर्ट में जा सकता है। ऐसे में माना जा रहा कि कानूनी दांव पेच समझने के बाद ही सरकार इसे लागू करेगी।
विधानसभाध्यक्ष सहित मंत्री भी हैं पक्ष में
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो भी 1932 के खतियान के आधार पर मूलवासी को परिभाषित करने की बात कह रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो भी 1932 का खतियान लागू करने के पक्ष में हैं। इस परिस्थिति में बुधवार को होनवाली कैबिनेट की बैठक अहम है। इस पर गहन चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।
ध्यान भटका रहे हेमंत : बाबूलाल मरांडी
उधर, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 1932 खतियान की बात भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कर रहे हैं। हेमंत सोरेन और स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो हों या कोई अन्य, ये सबलोग सबलोग भ्रष्टाचार का मामले पकड़े जाने पर खतियान समेत दूसरी बातें करने लगे हैं। इन्हें पता है कि सरकार संकट में है, इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।