आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। सुप्रीम कोर्ट ने उषा मार्टिन लिमिटेड की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के बाद विशेष (सीबीआइ) अदालत द्वारा शुरू की गयी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आग्रह किया गया था। यह मामला कंपनी द्वारा लौह अयस्क के अवैध निर्यात और बिक्री से संबंधित है। न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति कृष्णा मुरारी की पीठ ने 28 सितंबर को दिये फैसले में कहा कि आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए कोई मामला नहीं बनता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड हाइकोर्ट द्वारा सीआरपीसी की धारा 482 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करने का आदेश उचित है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता (यूएमएल) की ओर से जो कुछ भी प्रस्तुत किया गया है, वे सभी बचाव पक्ष के तर्क हैं, जिन पर विचार करने और परीक्षण के समय निपटाये जाने की आवश्यकता है।
क्या है मामला
यह मामला उषा मार्टिन लिमिटेड द्वारा लौह अयस्क के अवैध निर्यात और बिक्री तथा मनी लांड्रिंग से संबंधित है। सीबीआइ ने इस सिलसिले में 2016 में प्राथमिकी दर्ज की थी। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में 2019 में उषा मार्टिन की करीब 190 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इडी ने शिकायत का मामला दर्ज करते हुए कहा कि कंपनी ने पश्चिमी सिंहभूम के घाटकुरी गांव में स्थित खनन पट्टा विजय लौह अयस्क खदान के अनुदान के लिए अपने आवेदन में प्रस्तुत कैप्टिव खनन के अपने उपक्रम का उल्लंघन किया है और इस तरह के उपक्रम के बावजूद लौह अयस्क बेचा और निर्यात किया है। इस मामले में इडी की विशेष अदालत ने 20 मई, 2021 को नोटिस जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ उषा मार्टिन ने हाइकोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां भी इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट गयी थी।