बेगूसराय। प्रखर वक्ता और राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा है कि जी-20 की अध्यक्षता करने के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे एक नया रूप दिया है। अब तक जितनी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं थी, वह नीति निर्धारकों और शासकों के गिरफ्त में रहती थी लेकिन नरेन्द्र मोदी ने जी-20 को सामान्य लोगों से जोड़ दिया है।

राकेश सिन्हा ने मंगलवार को बेगूसराय में कहा है कि जी-20 के सभी नीति निर्धारकों का सामान्य लोगों के साथ संवाद कराया गया। इससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई प्रवृत्ति का जन्म हुआ है। यूनाइटेड नेशन एवं अन्य संस्थाओं को भी आम लोगों से जोड़ने का एक मॉडल मिल गया है, प्रतिमान मिल गया है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की उपयोगिता और रचनात्मक तभी रहेगी, जब वह आम लोगों से जुड़े।

उन्होंने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता भारत के लिए ऐतिहासिक है। यह भारत की उपलब्धि है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में एक नई प्रवृत्ति का जन्म हुआ। जी-20 की अध्यक्षता कर रहे भारत ने ”एक दुनिया, एक परिवार और एक भविष्य” का मूल मंत्र लिए हुए प्रयास किया है कि दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समूह जी-20 के सदस्य देश अपने मध्य के विवादों का हल निकालें।

एक स्वर में जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, आर्थिक निम्नीकरण और असमानता जैसे संकटों का समाधान करें। दुनिया को इस बात की उम्मीद है कि भारत की अध्यक्षता में हो रहे जी-20 से वर्तमान वैश्विक विभाजन में कमी आएगी। क्योंकि भारत कि विदेश नीति दुनिया में संतुलन के साथ मिलकर कार्य करने पर जोर देती है। भारत ग्लोबल साउथ देशों और दुनिया के मध्य एक सेतु के रूप में अपनी भूमिका निभाता है।

अभी भारत दुनिया के करीब सभी मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। बहुपक्षीय संस्थानों में हमारी स्थिति मजबूत हो रही है। जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ के उद्देश्य को समर्थन देने के साथ नई महत्वाकांक्षा लेकर आई है। इसने थर्ड वर्ल्ड की एकजुटता पर नए विचारों और उद्देश्यों को सामने ला दिया है। अब दुनिया भारत के वसुधैव कुटुंबकम के उस दर्शन को मान रही है, जिस दर्शन को नहीं मानती थी।

भारत को वैश्विक समूह जी-20 की अध्यक्षता ऐसे समय में मिली है। जब दुनिया अलग-अलग मुद्दों पर विभाजित नजर आती है। ऐसे में भारत का वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र के साथ यह प्रयास है कि वर्तमान समय में सभी देश एक मंच पर आकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालें। क्योंकि अभी दुनिया असंतुलन और दिशाहीनता का शिकार है। ना तो द्विध्रुवीय शीत युद्ध की स्थिति में है, ना ही बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

बल्कि संपूर्ण दुनिया धीरे-धीरे शक्ति केंद्रों में विभाजित होता जा रहा है। सदियों पूर्व से दुनिया को एक परिवार मानने कि भारतीय संस्कृति आज भी उसी सिद्धांत के साथ है। वसुधैव कुटुंबकम में सार्वभौमिक भाईचारा एवं सभी प्राणियों के परस्पर जुड़ाव का सार समाहित है। यह प्राचीन भारतीय दर्शन मानता है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। हर व्यक्ति इस परिवार का एक सदस्य है, चाहे उसकी नस्ल, धर्म, राष्ट्रीयता या जातीयता कुछ भी हो।

वसुधैव कुटुंबकम उस विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है कि सभी के साथ दया, करुणा और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए। शांति और सद्भाव के साथ रहने का प्रयास करते रहना चाहिए। आज के आपाधापी से भरे इस संसार में वसुधैव कुटुंबकम का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। हम एक ऐसे वैश्विक गांव में रहते हैं, जहां राष्ट्रों, संस्कृतियों और लोगों के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली होती जा रही हैं।

इसलिए वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को अपनाना और एक ऐसी दुनिया बनाने का प्रयास करना अनिवार्य हो जाता है। जहां सभी के साथ समान रूप से और गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाता हो। वसुधैव कुटुंबकम की भावना एक ऐसी दुनिया का निर्माण करेगी जो अधिक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और समावेशी होगी। एक बेहतर दुनिया के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की अहम भूमिका होगी।

राकेश सिन्हा ने कहा कि पहले भी हम वसुधैव कुटुंबकम की बात करते थे। लेकिन तब हमारी ताकत नहीं थी, हमारे नेतृत्व में वह दृष्टि नहीं था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृष्टि और भारत की ताकत ने वसुधैव कुटुंबकम को दुनिया को स्वीकार करवा दिया। वसुधैव कुटुंबकम का दर्शन है कि दुनिया बाजार नहीं परिवार है। पश्चिम इसको बाजार मानती है, हम इसे परिवार मानते हैं।

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