नोटबंदी के दौरान जिन बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों ने मिलीभगत कर कालेधन को सफेद करने में अपनी महती भूमिका निभाई थी अब उनके दिन लद चुके हैं। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी इन बैंक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
आपको जानकारी के लिए बतादें कि लश्कर-ए-तैयबा सदस्य मोहम्मद अयूब मीर और फेमा के तहत दिल्ली के दो हवाला कारोबारियों हरबंस सिंह और राज बेंगानी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
आपको बतादें कि नोटबंदी के दौरान कालाधन सफेद करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर ईडी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने एक्सिस बैंक के कर्मचारी नितिन गुप्ता और अन्य बैंक अधिकारियों की कुल 8.47 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त कर ली है।
गौरतलब है कि मोहम्मद मीर नई दिल्ली में पुलिस के स्पेशल सेल ने हरबंस सिंह से हवाला के 7 लाख रूपए वसूलते पकड़ा था। जब ईडी ने फेमा के तहत जांच शुरू की तो मीर ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य होने की बात कबूली। दरअसल मीर हवाला के जरिए आतंकी संगठन के लिए पैसे एकत्र करने का काम कर रहा था। पूछताछ के दौरान हरबंस सिहं ने कहा हवाला पैसों के भुगातान का अधिकार राज बेंगानी के पास था। इसके बाद ईडी ने राज बेंगानी को भी अरेस्ट कर लिया।
अभी तक नोटबंदी के दौरान कालेधन का सफेद बनाए जाने के बारे में कुछ लोगों की जानकारी 13 बैंकों ने सरकार को दे दी है। इस सूचना के बाद से करीब 2 लाख कंपनियों पर रोक लगा दी गई है। यहीं नहीं करीब 5800 फर्जी कंपनियां की डिटेल्स भी जारी कर दी गई है।
ये फर्जी कंपनियों ने बड़ी मात्रा में कालेधन को सफेद बनाने की कोशिश की है। आपको बतादें कि कुछ कंपनियों के तो 100-100 अकाउटंस थे वहीं एक कंपनी ने तो हद ही मचा दी उसके लगभग 2134 अकाउंटस की जानकारी हासिल हुई है। नोटबंदी के दौरान इन फर्जी कंपनियों ने करीब 4573 करोड़ रूपए की लेनदेन की थी।
शेल कंपनियों के करीब 4.5 लाख डायरेक्टर्स को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार कालेधन के खिलाफ अपनी लड़ाई यूं ही जारी रखेगी। चौधरी ने कहा कि ईमानदार कंपनियों को इस प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी लेकिन फर्जी कपंनियों के दिन जरूर लदेंगे।