बिहार में चुनाव में अभी काफी वक्त है लेकिन अभी से ही जातीय समीकरण साधने की कोशिशें तेज हो गई है. खबर है कि राजद, कांग्रेस के साथ मिलकर एक नये जातीय समीकरण बनाकर एनडीए को पटखनी देने की रणनीति बना रहा है.

राजद के पीछे अभी भी एमवाई (मुस्लिम यादव) समीकरण बेहद मजबूती के साथ खड़ा है. राजद कांग्रेस के साथ मिलकर सवर्ण वोटरों को इस समीकरण के साथ जोड़ एनडीए को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है. इसकी सुगबुगाहट तब दिखी जब पिछड़ों और मुसलमानो की राजनीति करने वाले लालू प्रसाद को बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती समारोह में मुख्य अतिथि बनाया गया.

कांग्रेस के 27 में से 12 विधायक सवर्ण तबके से आते हैं. कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष भी किसी सवर्ण को बनाने की तैयारी इसी कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है. राजद और कांग्रेस इस बात पर खुल कर तो बात नहीं करते लेकिन इशारा जरूर कर रहे हैं.

कांग्रेस के नेता अवधेश सिंह का कहना है कि लालू प्रसाद को बदनाम किया जाता है कि वो किसी खास तबके के विरोधी हैं. लेकिन इस बात में कोई सच्चाई नहीं है. ये सिर्फ आएसएस और बीजेपी की बदनाम करने की साजिश है. वहीं, राजद के सांसद जय प्रकाश यादव का भी कहना है कि लालू प्रसाद हमेशा कांग्रेस के साथ हमेशा साथ खड़े रहे और वो किसी के विरोधी नहीं रहे. बिहार में मुस्लिम 16, यादव 15 और सवर्ण वोटर 15 फीसदी के करीब हैं. दरअसल, राजद कांग्रेस के बहाने सवर्ण वोटरों को साध एनडीए के परंपरागत वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रहा है. राजद कांग्रेस के इस नए सियासी जातीय समीकरण पर एनडीए की निगाहें भी टिक गई है.

बीजेपी और जेडीयू के नेता सवर्ण वोटरों को लेकर राजद और कांग्रेस की रणनीति पर लालू प्रसाद के बहाने हमला बोल रहे हैं. केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव का कहना है कि जो लोग कुछ खास तबके को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. जनता को मालूम है कि लालू उस तबके का हमेशा विरोधी रहे हैं. वहीं, श्याम रजक का कहना है कि जदयू जाति की राजनीति नहीं करती है जो लोग ऐसा कर रहे हैं जनता उन्हें सबक सिखाएगी. हमलोग केवल विकास की राजनीति करते हैं.

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