चुकंदर की गणना कंदवाली सब्जियों में की जाती है। इसका प्रयोग सब्जी की अपेक्षा सलाद के रूप में अधिक किया जाता है। यह पौष्टिक होने के कारण हर प्रकार की कमजोरी को दूर करनेवाला, रक्तशोधक व कई बीमारियों में लाभदायक है।
वे महिलाएं, जिन्हें माहवारी में कष्ट होता है, उन्हेंं अधिक से अधिक कच्चा चुकंदर खाना चाहिए। यह दूध और रक्त बढाता है और माहवाीर में भी लाभ पहुंचाता है। अध्ययन के आधार पर कहना है कि सफेद और लाल चुकंदर भी रक्तचाप को कम करती है। इसकी वजह इसमें भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला नाइट्रेड है। यह एक ऐसा रसायन है जो पाचन तंत्र में पहुंच कर नाइट्रिक आक्साइड बन जाता है और रक्त प्रवाह को बढाता है तथा रक्तचाप को कम रखता है। यह मांसपेशियों की आक्सीजन की जरूरत को भी कम कर देता है। हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप एक गंभीर बीमारी होती है जो हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का भी बडा खतरा पैदा करती है। चुकंदर के 100 ग्राम रस में 25 ग्राम सिरका मिलाकर बालों की जडों में लगाने से रूसी का नाश होता है और बालों का झडना भी रूक जाता है। चेहरे के दाग-झाइयां, मुंहासे आदि ठीक हो जाते हैं और चेहरा कांतिमय हो जाता है।
चोट-मोच में चुकंदर की पत्तियों का ताजा रस लाभ पहुंचाता है। पत्तों को रगडकर मोचवाले स्थान पर रखकर पट्टी बांध देना चाहिए। पत्तों के रस को शहद में मिलाकर दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है। चुकंदर के 100 ग्राम रस में 25 ग्राम सिरका मिलाकर बालों की जडों में लगाने से रूसी का नाश होता है और बालों का झडना भी रूक जाता है।