राज्य में युवा शक्ति को पहचानने की जरूरत है। देश की सत्ता में उलट फेर करने वालों में युवाओं की अहम भूमिका होती है इसलिए युवाओं की समस्याओं का नजर अंदाज करके राज्य या राष्ट्र का विकास संभव नहीं है। राज्य में युवाओं की पहली जरूरत रोजगार है इस बात को ध्यान में रखते हुए ही उनके समग्र विकास के लिए युवा नीति बनाने की पहल हुई थी। राज्य सरकार ने इसके उद्देश्यों को सुगम ढंग से युवाओं तक पहुंचाया जाए इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग का भी गठन किया। इस तरह मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ही युवाओं के हौसले अफजाई करते रहे हैं।
एक साल कुछ समय में ही पास के गांव में युवा सम्मेलन हुआ था जिसमें युवाओं को अधिक शक्ति संपन्न करने कई रोजगारोन्मुखी कार्यशाला भी आयोजित की गई थी। देशके नवनिर्माण में युवाओं की शक्ति को नहीं नकारा जा सकता। यहदेखते हुए युवाओं को दिमागी और शारीरिक ऊर्जा मिल सके इसके भरपूर उपाय प्रदेश सरकार कर रही है। यह भी सच है कि हर किसी युवा को नौकरी नहीं दी जा सकती किंतु उसकी रुचि अनुरूप किसी न किसी क्षेत्र में उसकी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन तो किया जा सकता है। राज्य सरकार का कौशल विकास कार्यक्रम ऐसी प्रतिभाओं को एक अच्छा अवसर सुलभ कराने बहुत बेहतर कार्यक्रम है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ग्रामीण युवाओं के प्रति बेहद उदारभाव से पंचायतों को शक्ति दी है कि वे अपने गांवों के युवाओं को ओपन जिम जैसी सौगात देकर उनको उनकी शक्ति का अहसास दिलाएं। यही युवा न केवल अपने घर परिवार के लिए जिएंगे बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी पूर्ण सहभागिता देकर विकास के नए आयाम भी गढ़ेंगे। राज्य योजना मंडल द्वारा प्रदेश के युवाओं के विचार एवं सुझाव तथा देश के विभिन्न राज्यों की युवा नीति का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ युवा नीति तैयार की गई है। जिसका एक प्रारूप जिसमें सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की जानकारी कैरियर, मार्गदर्शन देने केलिए युवा पोर्टल तथा ग्राम पंचायतों में ओपन जिम प्रारंभ करने का प्रस्ताव है।
कैरियर मार्गदर्शन के लिए प्रदेश के शिक्षण क्षेत्र के प्राध्यापकों की विशेष भागीदारी से स्कूलों के बच्चों को युवा दृष्टि के लिए सचेत और सक्षम करने में विशेष भूमिका हो सकती है। बच्चे को है वो माता-पिता पालक से कहीं ज्यादा अपने गुरुओं की बात को तवज्जों देते है इसलिए यह माना जाना चाहिए कि युवा नीति को युवाओं के जीवन में उतारने शिक्षकों को अहम भूमिका हो सकती है। शिक्षकों-प्राध्यपकों को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नए विश्वविद्यालयों और नई उच्च शिक्षण संस्थानों के आसपास के क्षेत्र को टाउनशिप में परिवर्तित करने से हॉस्टल की बड़ी समस्या हल हो सकती है और बच्चों को शहरी जीवन के आधुनिक कल्प से जोड़ा जा सकता है। इससे प्राध्यापकों को मार्गदर्शक टीम भी तैयार होगी जो उस क्षेत्र विशेष के युवाओं को ढंग से विकसित कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा अनुरूप डिजीटल भागीदारी के लिए युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण देने की जरूरत है खासकर आधुनिक वित्तीय लेनदेन के तरीकों जिनमें ऑनलाइन बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेविट कार्ड तथा ई- वालेट के उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण देने से वे देश के बाजारों को अच्छा वातावरण देने में सहायक होंगे। कमजोर छात्रों को संस्था की जनभागीदारी समिति द्वारा सहायता देकर नवजीवन देने की कल्पना बेहद विद्वता भरा संकल्प है। युवा नीति में यदि ऐसे मनोभावों का समावेश है तो नि:संदेह युवाओं को पुराने ढर्रे से बाहर निकलने में देर नहीं लगेगी।