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    Home»विशेष»संपादकीयः सफाई या दिखावा
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    संपादकीयः सफाई या दिखावा

    आजाद सिपाहीBy आजाद सिपाहीOctober 27, 2017No Comments3 Mins Read
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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने आगरा दौरे के केंद्र में ताजमहल को रखा। उन्होंने ताजमहल को न सिर्फ प्रेम का प्रतीक और दुनिया की शानदार इमारत कहा, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने वाली कई योजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने इसके परिसर में झाड़ू लगा कर लोगों को सफाई का संदेश भी दिया। सवाल है कि उनके इस दौरे के संदर्भ को कैसे देखा जाए! सामान्य स्थितियों में इसे एक स्वाभाविक और सहज घटनाक्रम माना जाता। ताजमहल को आज यूनेस्को की सूची में विश्व धरोहरों के बीच जगह प्राप्त है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से ताजमहल के बारे में जिस तरह का विवाद खड़ा किया गया, वह हैरान करने वाला था। जाहिर है, यह भारत की एक अनमोल विरासत को सांप्रदायिक शक्ल देने की कोशिश थी, जिसे रोकने के बजाय खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कह दिया कि ताजमहल भारतीय संस्कृति का प्रतीक नहीं है। देश और दुनिया कीऐतिहासिक धरोहरों में ताजमहल को जो जगह हासिल है, उसके मद्देनजर भाजपा नेताओं के ऐसे रुख पर स्वाभाविक ही लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई। जाहिर है, अब योगी आदित्यनाथ ने ताजमहल के दौरे के बाद उसकी तारीफ करके शायद उसी की भरपाई की कोशिश की है।

    इस दौरे का एक अहम पहलू यह है कि उन्होंने ताजमहल के परिसर में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सफाई करके लोगों को ‘स्वच्छ भारत’ का संदेश देने की कोशिश की। उनकी इस पहल की अहमियत से किसी को इनकार नहीं हो सकता। ऐसा करते हुए मुख्यमंत्री ने हाथों में सुरक्षा दस्ताने, सिर पर सफेद टोपी और प्रदूषणरोधी मॉस्क पहना हुआ था। कहीं भी कचरे या गंदगी की सफाई के दौरान व्यक्ति को इसी तरह के सुरक्षात्मक उपायों से लैस होना चाहिए। मगर देश के किसी भी हिस्से में सामान्य सफाई कर्मियों को शायद ही कभी इस तरह की वेशभूषा में खुद को सुरक्षित रख कर यह काम करते देखा जाता है। धूल और गंदगी के बीच सफाई कर्मचारी बिना सुरक्षा उपायों के काम करते हुए दिखते हैं। विकास के तमाम दावों के बीच हम ऐसी व्यवस्था में रह रहे हैं, जहां सीवर की सफाई के लिए किसी सफाईकर्मी को जानलेवा गैसों के बीच उतरना पड़ता है। उनके पास दस्ताने, जूते, गैस मॉस्क या कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं होते। यह बेवजह नहीं है कि आए दिन सीवरों में सफाईकर्मियों की मौत की खबरें आती हैं।

    विज्ञान और तकनीकी उपलब्धि के मोर्चे पर देश नई ऊंचाइयां छू रहा है। अंतरिक्ष में मंगलयान से लेकर प्रक्षेपण यानों तक के मामले में भारत ने आज दुनिया भर में एक जगह बना ली है। लेकिन इसी के बरक्स हकीकत यह है कि बेहद असुरक्षित हालात में काम करने वाले सफाईकर्मियों को जान जोखिम में डाल कर अपनी ड्यूटी पूरी करनी होती है। ऐसी स्थिति में हमारे नेता अगर सुरक्षा के सभी जरूरी उपायों से लैस होकर औपचारिकता भर के लिए सफाई करते दिखते हैं तो यह एक मजाक की तरह ही लगता है। सवाल है कि प्रतीकात्मक संदेश के लिए हमारे अनेक नेता अगर सफाई के वक्त सभी सुरक्षा उपायों से लैस हो सकते हैं तो उन सफाईकर्मियों के लिए यही मानक सुनिश्चित क्यों नहीं किया जा सकता, जिन्हें वास्तव में यह काम करना पड़ता है?

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