झारखंड सरकार अब अपने कंधे का बोझ कम करना चाह रही है. इसीलिए कई संस्थाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा गया है ताकि सरकार के खजाने पर बोझ कम हो. ऐसी संस्थाएं जो सरकार के अनुदान से चल रही हैं उन्हें काफी लंबे समय से खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए कहा जाता रहा है.

बता दें कि झारखंड में सरकार की कई संस्थाएं आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं. स्थिति ऐसी होती है कि स्थापना व्यय की व्यवस्था भी सरकार को करनी पड़ती है. इस कारण ऐसी संस्थाएं न तो ठीक तरीके से काम कर पाती हैं और न ही नीतियां बना पाती हैं. राज्य सरकार के मंत्री कहते हैं कि नगर निकाय,पंचायती संस्थाएं, खनिज विकास निगम जैसी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर हैं. इन्हें टैक्स, चुंगी, रायल्टी मद में राशि आती है.

राज्य में लगभग दो दर्जन ऐसी संस्थाएं हैं जिनको राज्य सरकार अनुदान के मद में करोड़ों रूपए हर साल देती है. सरकार चाहती है कि ये संस्थाएं अपने स्रोत खुद तैयार करें. पंचायतों को इसके लिए अधिकार भी दिए गए हैं. सरकार के लोग कहते हैं कि यह जरूरी है. नगर निकायों के अधीन कई तरह के कर अधिरोपित होते हैं. निजी मकान, बाजार व अन्य माध्यम से राजस्व वसूलने को कहा गया है.

इस मामले में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. हरीश्वर दयाल ने कहा कि जो संस्थाएं रिवेन्यू जेनरेट कर सकती हैं उन्हें लंबे समय से सलाह दी जा रही है कि वे आत्मनिर्भर बनें. आर्थिक रूप से खुद को मजबूत बनाएं. ऐसे में वे काम करने के लिए भी ज्यादा स्वतंत्र रहेंगे.

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