रांची। उषा मार्टिन कर्मियों की हड़ताल का खामियाज अब उनके बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार को कंपनी ने स्कूल बस सेवा बंद कर दी। नतीजतन मजदूरों के बच्चे स्कूल नहीं जा सके। बच्चों की पढ़ाई अब बंद हो गयी है। इससे बौखलाये मजदूरों ने आंदोलन को और तेज करने का एलान कर दिया। मंगलवार को कंपनी के खिलाफ राज्यपाल को वे ज्ञापन सौंपेंगे। इससे पहले जुलूस के रूप में जयपाल सिंह स्टेडियम से निकलेंगे।
सीएम और श्रमयुक्त को पत्र लिख कर लगायी गुहार
सोमवार को कर्मियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और श्रमायुक्त को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि पिछले 104 घंटे से अधिक समय से कंपनी में काम ठप है। कर्मी धरना पर बैठे हुए हैं। धरना पर बैठे कर्मचारियों को झुकाने के लिए प्रबंधन तमाम हथकंडे अपना रहा है। कैंटीन, शौचालय पहले ही बंद करा दिया गया, अब स्कूल बस सेवा भी बंद कर दी गयी। कहा गया है कि 20 प्रतिशत नहीं, तो कम से कम 8.33 प्रतिशत की दर से 70 हजार रुपये एवं कैजुअल मजदूरों को 21 हजार रुपये की दर से बोनस दिलायी जाये, वरना हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी।
104 घंटों से कामकाज ठप कर कामगार बैठे हैं धरना पर मामला राष्ट्रीय स्तर पर उछला
रांची। उषा मार्टिन कामगारों की हड़ताल अब सिर्फ रांची और झारखंड तक सीमित नहीं है। मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर उछल चुका है। यहां के कामगार पिछले 104 घंटे से ज्यादा समय पर कामकाज ठपकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उषा मार्टिन कामगारों की हड़ताल को राष्ट्रीय दैनिक द् इकोनॉमिक टाइम्स ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इसने खुलासा किया है कि कंपनी में अनियमित वेतन का भुगतान होता रहा है, जिससे कर्मचारी अक्रोशित हैं। दरअसल सितंबर में ही टाटा स्टील के साथ कंपनी ने यूएमएल के इस्पात कारोबार का सौदा किया है। इसके बाद से ही अपने भविष्य को लेकर यहां के कामगार चिंतित हैं।
कंपनी की बिक्री में सरकारी हस्तक्षेप की मांग: उषा मार्टिन के एक संघ ने वेतन के अनियमित भुगतान के बारे में अपनी चिंता से लोगों को अवगत कराया है। कामगारों ने झारखंड में रोप वायर का निर्माण करनेवाली कंपनी की बिक्री को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। टाटा स्टील ने उषा मार्टिन लिमिटेड (यूएमएल) के इस्पात कारोबार के अधिग्रहण की घोषणा के कुछ हफ्तों बाद 4,300-4,700 करोड़ रुपये के हिस्सेदारी ली है। कंपनी की पंजीकृत यूनियन मजदूर सभा ने उषा मार्टिन लिमिटेड के इंजीनियरिंग विंग में वेतन अनियमितता को लेकर मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक पत्र लिखा था। यूनियन में बिक्री समझौते में अविलंब हस्तक्षेप किये जाने की मांग भी सरकार से की है।
सीएम को पत्र लिख कर शोषण से कराया अवगत: उषा मार्टिन लिमिटेड, टाटीसिल्वे रांची (झारखंड) के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और झारखंड के श्रमायुक्त को पत्र लिखकर कंपनी के प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के शोषण की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में कहा गया है कि पिछले दो-तीन वर्षों से उन्हें अनियमित वेतन भुगतान किया जा रहा है। समय पर वेतन भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गयी है। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि टाटा स्टील द्वारा कंपनी को अधिग्रहित किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो। साथ ही इस समझौते में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी न हो, यह सुनिश्चित किया जाये।
1700 कामगार हैं परेशान: उषा मार्टिन रांची 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। कंपनी में 1700 से अधिक कामगार हैं। इस संयंत्र में रोप वायर का निर्माण किया जाता है। इसका उपयोग तेल और अपतटीय, खनन, क्रेन, लिफ्ट, हवाइ रोपवे और पुलों में किया जाता है। सितंबर में टाटा स्टील ने कहा कि उसने यूएमएल के इस्पात कारोबार का अधिग्रहण के लिए सौदा कर लिया है। सौदा 6-9 महीने में पूरा होने की उम्मीद है।