मांडर। दो दिवसीय ऐतिहासिक मुड़मा जतरा का विधिवत उद्घाटन गुरुवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास के हाथों हुआ। जतरा-स्थल पहुंचने के बाद उन्होंने धर्मगुरु बंधन तिग्गा के साथ आदिवासियों की शक्ति पीठ माने जानेवाले शक्ति खूंटा की पूजा-अर्चना की। दीप जला कर जतरा का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि यहां आशीर्वाद देने नहीं आया हूं, बल्कि शक्ति खूंटा से यह आशीर्वाद लेने आया हूं कि राज्य की सवा तीन करोड़ जनता खुशहाल रहे। राज्य के विकास की जो गति है, उसमें निरंतरता बनी रहे। राज्य में जो भी मेला, जतरा, हाट लगते हैं, वे आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन का आधार होते हैं। इसके माध्यम से मिलने-जुलने, सामानों की खरीद-बिक्री आदि होती है, जो उनकी जीविका का भी एक आधार होता है। नृत्य, संगीत और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम ही झारखंड की संस्कृति की पहचान है और इसे अक्षुण्ण बनाये रखना हम सबका पहला कर्तव्य है।
राज्य के कुल बजट का 42 प्रतिशत केवल अुनूसूचित जनजातियों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। आदिवासी खुद से जतरा लगाने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए पिछले साल सरकार ने इस जतरा को राजकीय जतरा घोषित किया था। आदिवासियों की संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रत्येक गांव में अखरा का निर्माण कराया जा रहा है। यही इच्छा है कि जब तक यह पृथ्वी रहे, तब तक आदिवासी संस्कृति की पहचान ढोल, ढांक और मांदर की थाप सुनायी देती रहे। केंद्र की सरकार ने जो आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है, उसमें राज्य के 62 लाख परिवारों में से 57 लाख परिवारों को इसका फायदा मिलेगा। राज्य सरकार महिलाओं के विकास के लिए भी कृतसंकल्पित है, सरकारी स्कूलों में बच्चों को जो ड्रेस दी जाती है, उसकी सिलाई संबंधित पंचायत की महिला समूहों द्वारा कराया जायेगा। धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने मुड़मा जतरा की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला वहीं विधायक गंगोत्री कुजूर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
इनकी रही मौजूदगी
उपायुक्त राय महिमापत रे, एसएसपी अनीश गुप्ता, एसडीओ गरिमा सिंह, ग्रामीण एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग, बीडीओ विष्णुदेव कच्छप, सीओ शंकर कुमार विद्यार्थी, चान्हो सीओ प्रवीण कुमार सिंह, बीडीओ पायल राज, बाबू पाठक, बीस सूत्री अध्यक्ष रामबालक ठाकुर, छेदी साहू, बहादुर उरांव, जगराम उरांव, रंथू उरांव, महादेव उरांव, अनिल उरांव, शिव उरांव मौजूद थे।