रांची/ चतरा। चतरा संसदीय क्षेत्र में इन दिनों झारखंड के अन्य लोकसभा क्षेत्रों की तुलना में अधिक चहल-पहल दिखाई दे रही है। अभी एनडीए और यूपीए में सीट बंटवारे का समझौता नहीं हुआ है, लेकिन चतरा से राजद के एक संभावित उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इतना ही नहीं, वह संभावित उम्मीदवार मैदान में भी कूद गया है। यह उम्मीदवार हैं सुभाष प्रसाद यादव। वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के रिश्तेदार नहीं हैं, लेकिन बड़ी घनिष्ठता है और वह बड़े कारोबारी हैं।
चतरा समेत झारखंड के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अनुसार सुभाष प्रसाद यादव पैसे के बल पर चतरा से लोकसभा का चुनाव जीतने की तैयारी में जुट गये हैं। राज्यसभा चुनाव में थैलीशाहों का जलवा तो जगजाहिर है, लेकिन यह संभवत: पहला मौका है, जब धनबल की ताकत से लोकसभा का चुनाव जीतने की कोशिश हो रही है। अब तक लोस चुनाव में धन की ताकत की बड़ी भूमिका होती थी। कई उम्मीदवारों पर धनबल का दुरुपयोग करने के आरोप लगते थे, लेकिन चतरा में ऐसा पहली बार हो रहा है कि केवल धन के बल पर कोई लोकसभा का चुनाव जीतने का दावा कर रहा है। यह न केवल देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को खुली चुनौती है, बल्कि चतरा के लोगों की कठिन परीक्षा भी है।
कौन हैं सुभाष प्रसाद यादव
पटना जिले के पुनपुन के मूल निवासी सुभाष प्रसाद यादव बालू और लोहे के बड़े कारोबारी हैं। बिहार और उत्तरप्रदेश में उनका कई हजार करोड़ का कारोबार बताया जाता है। तीन दर्जन के करीब कंपनियों के वह मालिक बताये जाते हैं। पिछले जून-जुलाई में पहली बार चतरा की धरती पर उनके पैर पड़े। उन्होंने चतरा में करीब 40 लाख रुपये की लागत से एक मकान खरीदा और उसके बाद अपने रंग में आ गये।
पहले सुभाष प्रसाद यादव ने स्थानीय राजद कार्यकर्ताओं पर अपना प्रभाव जमाने का प्रयास किया। इसमें वह पूरी तरह सफल नहीं हुए, तो उनके समर्थकों ने यह कहना शुरू कर दिया कि सुभाष प्रसाद यादव बोरों में भरकर नोट लेकर आये हैं। उनके समर्थकों की यह बात सही प्रतीत होने लगी, क्योंकि सुभाष प्रसाद यादव ने बोरों का मुंह खोल दिया। वह इस कदर पैसे उड़ाने लगे, मानो साक्षात कुबेर का खजाना उनके हाथ लग गया हो।
सुभाष प्रसाद यादव ने चतरा सदर प्रखंड के जितनी गांव में सड़क मरम्मत के लिए 18 लाख रुपये दे दिये। इसके बाद मां भद्रकाली मंदिर में तीन लाख रुपये का दान दे दिया। प्रतापपुर प्रखंड टंडवा गांव में एक लाख रुपये शेड बनाने के लिए और कान्हाचट्टी प्रखंड में छठ घाट की सीढ़ी के लिए 25 हजार रुपये दिये। भद्रकाली मंदिर को दिये गये तीन लाख रुपये में से दो लाख रुपये पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा के लिए और बाकी एक लाख रुपये प्रबंधन समिति को दिये हैं। सुभाष प्रसाद यादव महाष्टमी को चतरा पहुंचे और जिले की लगभग सभी पूजा समितियों को 25-25 हजार रुपये का चंदा दिया।
कहा जाता है कि सुभाष प्रसाद यादव के गृह प्रवेश के मौके पर आयोजित पार्टी में कई प्रभावशाली हस्तियों ने भाग लिया। सैकड़ों गाड़ियों के काफिले में वे चतरा पहुंचे थे। उस दिन इटखोरी की शराब दुकानों पर जमघट लग गया था। सुभाष यादव ने राजद के स्थानीय नेताओं को दो खेमों में बांट दिया है। सुभाष प्रसाद यादव का राजनीतिक कद कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी महीने की तीन तारीख को चतरा में आयोजित राजद के जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान लग गया था। जिला कमेटी ने इस सम्मेलन को सदर थाना मैदान में आयोजित किया था। इसकी सफलता के लिए व्यापक तैयारियां की गयी थीं। इस आयोजन ने सुभाष समर्थकों को नाराज कर दिया।
उन्होंने आनन-फानन में उसी दिन नगर भवन में समानांतर सम्मेलन का आयोजन कर दिया। उस आयोजन में सुभाष यादव शामिल नहीं हुए, लेकिन प्रदेश के प्रभारी सांसद जयप्रकाश नारायण यादव एवं प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्ण देवी नगर भवन के सम्मेलन में शामिल हुईं। जिला कमेटी का सम्मेलन उनके लिए मामूली था। सुभाष प्रसाद यादव के समर्थक जहां-तहां यह दावा कर रहे हैं कि वह चतरा के विकास के लिए 68 करोड़ रुपये लेकर आये हैं। यह रकम अगले दो महीने में खर्च कर देनी है। उनके इस स्टैंड ने दूसरे दलों के संभावित टिकटार्थियों का अनुमान ही गड़बड़ा दिया है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे सुभाष यादव का मुकाबला कैसे करें।