रांची। उषा मार्टिन में टोकन स्ट्राइक कर रहे कर्मचारी शुक्रवार की शाम से काम पर लौट आये हैं। कर्मचारियों ने यह निर्णय श्रमाधीक्षक से हुई वार्ता के बाद लिया है। हालांकि कंपनी की ओर से प्रबंधन का कोई भी अधिकारी वार्ता में नहीं पहुंचा था। हड़ताल कर रही यूनियन इंजीनियरिंग मजदूर सभा के अंजनी पांडेय ने बताया कि श्रमाधीक्षक के आग्रह पर उन्होंने टेकन स्ट्राइक फिलवक्त वापस ले लिया है। श्रमाधीक्षक ने एक सप्ताह में उनकी मांगें पूरी कराने का आश्वासन दिया है। यदि 22 अक्तूबर तक उनकी बोनस की मांग पूरी नहीं हुई, तो वे हड़ताल का नोटिस दे देंगे। इस बार पूरी तरह हड़ताल कर कंपनी को ठप करा दिया जायेगा। उन्होंने बताया प्रबंधन के अधिकारियों को मजदूरों की कोई परवाह नहीं है, इसीलिए उनकी ओर से बातचीत के लिए कोई नहीं आया, जबकि श्रमाधीक्षक ने नोटिस जारी कर सभी को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। इस बार कंपनी को अंतिम मौका दिया गया है। बातचीत के लिए यूनियन से लगभग 50 कामगार श्रमाधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे।
कर्मियों की मांगें
कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी लाभ में चल रही है। बावजूद इसके उन्हें बोनस से वंचित किया जा रहा रहा है। वहीं, टाटा हिंडाल्को अपने मजदूरों को एक लाख रुपये से ज्यादा बोनस के तौर पर दे रही है। मजदूरों ने स्थानीय सांसद पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया है। हड़ताली मजदूर पीएम और सीएम को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का आग्रह कर चुके हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें 20 प्रतिशत नहीं, तो कम से कम 8.33 प्रतिशत की दर से 70 हजार रुपये एवं कैजुअल मजदूरों को 21 हजार रुपये की दर से बोनस दिलायी जाये।
प्रबंधन पर परेशान करने का आरोप
हड़ताली कर्मचारी उषा मार्टिन प्रबंधन पर उन्हें परेशान करने का अरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कंपनी ने स्कूली बच्चों के लिए चलायी जा रही बस सेवा बंद कर दी है। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए कैंटीन की सुविधा बंद कर दी गयी है। साथ ही उनके शौचालयों पर ताला लगा दिया है, ताकि कर्मचारी परेशान रहें। यह अमानवीय कृत है।
रांची से मुंबई तक मजदूर लगा चुके हैं गुहार
उषा मार्टिन के हड़ताली यूनियन ने अनियमित वेतन भुगतान और बोनस से वंचित किये जाने के बारे में एनएसइ और बांबे स्टॉक एक्सचेंज को भी बताया है। उन्होंने झारखंड में टाटा स्टील को कंपनी की रोप वायर प्रोडक्शन विंग की बिक्री के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि कंपनी टाटा स्टील द्वारा अधिग्रहित की जानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रहे।