नई दिल्ली: पैरिस में छह दिवसीय फाइनैंशल एक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की पूर्ण बैठक में पाकिस्तान को लेकर चीन के रुख पर सबकी नजर होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वीकेंड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई है। रविवार से शुरू एफएटीएफ की बैठक से पहले मामल्लपुरम शिखर वार्ता में चिनफिंग अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरफ से बिना किसी भेदभाव के आतंकी समूहों को ट्रेनिंग, फाइनैंसिंग और सहयोग के खिलाफ FATF को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की अहमियत पर जोर देते दिखे।

एफएटीएफ की अध्यक्षता फिलहाल चीन के पास है, जिसे पाकिस्तान के मित्र देश के रूप में देखा जाता है। सूत्रों ने कहा कि चिनफिंग और मोदी के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता के टेरर फाइनैंसिंग पर केंद्रित होने के बाद अब सबकी निगाहें चीन पर होंगी। चीन के शियांगमिन लिउ ने इसी साल की शुरुआत में अमेरिका के मार्शल बिलिंगस्ली से एफएटीएफ प्रेजिडेंट का पदभार ग्रहण किया था।

मामल्लपुरम में दो-दिवसीय वार्ता के अंत में मीडिया से बात करते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा, ‘दोनों लीडर्स में इस बात पर सहमति बनी है कि तेजी से जटिल होती दुनिया में आतंकवाद और कट्टरपंथ की चुनौतियों से निपटना काफी अहम है। दोनों ऐसे देशों के नेता हैं, जो क्षेत्रफल या आबादी के मामले में नहीं, बल्कि विविधता के मामले में भी बड़े हैं।’

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