अजय शर्मा
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा प्रथम और द्वितीय जेपीएससी में चयनित अधिकारियों की नौकरी पर अब तलवार लटक रही है। फर्स्ट में 64 और सेकेंड में 172 अधिकारी बनाये गये थे। जेपीएससी ने परीक्षा का आयोजन किया था और इतनी संख्या में नौकरी की अनुशंसा की थी। जिन अधिकारियों की जांच नियुक्ति की तिथि से ही चल रही है। उन्हें क्रमवार प्रोन्नति भी मिल रही है। दोनों प्रतियोगिता परीक्षाओं की जांच कर रही एजेंसी ने इस संबंध में संबंधित विभाग से जवाब भी मांगा है। यह पूछा है कि कैसे इन अधिकारियों को प्रोन्नति दी जा रही है।
अधिकारियों ने योग्य अभ्यर्थियों को जानबूझ कर फेल कर दिया, उन्हें अफसर नहीं बनने दिया और वैसे परीक्षार्थियों को पास किया गया, जो योग्यता में कहीं टिकते ही नहीं थे। वे तो प्रतियोगिता परीक्षा के कई विषयों में फेल भी हैं। सीबाीआइ ने जिनकी भी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करायी। उसमें से अधिकांश में गड़बड़ी पायी गयी है। इतना ही नहीं 47 अधिकारियों की उत्तर पुस्तिकाओं के संबंध में कोई जानकारी किसी के पास नहीं है।
इन अफसरों को पहुंचाया फायदा
इसी नियुक्ति परीक्षा में धीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ ज्योति कुमार सिंह, सुदर्शन मुर्मू, मोहनलाल मरांडी, संतोष कुमार गर्ग, अनवर हुसैन, हेमा प्रसाद और संजय पांडेय को फायदा पहुंचाया गया। सीबाआइ ने इसे बड़ी गड़बड़ी मानी है।
इन अधिकारियों की उत्तर पुस्तिका से भी छेड़छाड़
कमलेश्वर नारायण, जीतेंद्र मुंडा, शालिनी विजय, मेघना रूबी कच्छप, राजीव कुमार, हरिवंश पंडित, ज्योति कुमारी झा, कुमार मनीष, परमेश्वर मुंडा, विनय कुमार मिश्र, स्मृति कुमारी, संजीव कुमार, सौरभ प्रसाद, अलका कुमारी और कमुद्दीन टुडू।
सीबीआइ ने माना झारखंड में सबसे बड़ा मेधा घोटाला
सीबीआइ अधिकारियों ने माना है कि जेपीएससी की 16 परीक्षाओं के बाद नौकरी देने के लिए जिनकी अनुशंसा की गयी है। उसमें से अधिकांश की नियुक्ति में गड़बड़ी की गयी है। सीबीआइ फिलहाल जेपीएससी प्रथम और द्वितीय में अंतिम जांच रिपोर्ट और चार्जशीट कोर्ट में सुपुर्द करेगी।