अजय शर्मा
रांची। टंडवा में सीसीएल की मगध और आम्रपाली परियोजना, पिपरवार की चार और उरीमारी की तीन कोलियरियों में खूनी संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार है। कोयला के अवैध खेल में रंगदारी वसूलने को लेकर कई अपराधी संगठन सीधे तौर पर सामने आ गये हैं। कोलियरियों में अपने को मजबूत साबित करने के चक्कर में अब हत्याओं का दौर शुरू हो गया है। मगध और आम्रपाली में दबंग कमेटी बनाकर प्रति टन 254 रुपये की वसूली की जा रही थी। इसे रोकने की कोशिश की गयी, तो तरीका बदला गया और लोडिंग के नाम पर वसूली की जाने लगी। टीपीसी उग्रवादी फिर से कब्जा करने के लिए कोई भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस संगठन को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। वसूली कम होने से वैसे पुलिस अफसर परेशान हो गये हैं, जिनको हिस्सा मिलता था। जेपीसी के उग्रवादी समय-समय पर टंडवा में फायरिंग कर रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति पिपरवार की चार कोलियरियों में है। इन कोलियरियों से अवैध वसूली पर टीपीसी का कब्जा है। सप्ताह भर पहले चतरा एसपी की अगुवाई में छापामारी की गयी। टीपीसी के उग्रवादी और सीसीएल के आठ कर्मचारी आरोपी बनाये गये। पुलिस 77 नामजद अभियुक्तों को खोज रही है। यहां टीपीसी, जेपीसी और जेजेएमपी के उग्रवादी कब्जा करना चाहते हैं। चार दिन पहले एक निजी कंपनी के लिफ्टर साबिर अंसारी को उग्रवादियों ने भून दिया था। टीपीसी के उग्रवादियों का कहना था कि बगैर उन्हें रंगदारी दिये पिपरवार में कोई काम नहीं कर सकता।
उरीमारी की चार कोलियरियों में अवैध वसूली में विवाद के कारण ही गहन टुडू की हत्या की गयी। इस हत्या की गुत्थी अभी सुलझ नहीं पायी है। अचानक टंडवा, पिपरवार और उरीमारी में कई उग्रवादी संगठन सक्रिय हो गये हैं। पुलिस के कुछ अफसर भी चाहते हैं कि इन कोलियरियों में अवैध वसूली चालू रहे। समय रहते अगर कार्रवाई नहीं की गयी, तो कोयलांचल की धरती पर गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती रहेगी।
एनआइए भी सुस्त
टेरर फंडिंग की जांच कर रही एजेंसी एनआइए भी इन दिनों सुस्त हो गयी है। भारी दबाव के कारण एजेंसी जांच को गति नहीं दे पा रही है। करीब एक अरब रुपये के टेरर फंडिंग की जांच एनआइए के पास है। टंडवा के चार अलग-अलग मामलों की भी जांच इसी एजेंसी के पास है। अवैध वसूली को हवा देने वाले अफसरों के खिलाफ जांच करने की हिम्मत एजेंसी अभी तक नहीं जुटा पायी है।

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