नयी दिल्ली/ममल्लापुरम। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का दो दिन का दौरा भारतीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम रहा। कश्मीर की रट लगाते हुए भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति ने भारत के सख्त ऐतराज के बाद बातचीत में भारत के इस आंतरिक मुद्दे को छेड़ने की कोशिश नहीं की। बड़ी बात यह रही कि भारत आतंकवाद के मुद्दे को चर्चा का विषय बनाने में कामयाब रहा। आशंका जतायी जा रही थी कि कश्मीर मुद्दे के कारण दोनों नेताओं की बातचीत पटरी से उतर सकती है। इस आशंका को उस समय और बल मिला था, जब पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के साथ बैठक के बाद चीन ने कश्मीर पर यूएन चार्टर का अनुसरण करने की मांग की थी।
विदेश सचिव विजय गोखले ने मोदी-चिनफिंग की मुलाकात और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में उठे मुद्दों की मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के साथ हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान कश्मीर के मुद्दे पर एक बार भी चर्चा नहीं हुई, जबकि आतंक पर विस्तार से बात हुई। विदेश सचिव ने बताया कि दोनों नेताओं की लंबी बातचीत के दौरान एक बार भी कश्मीर मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आतंकवाद का मिल कर सामना करने की बात कही।
प्रतिनिधि मंडल स्तर की बैठक में पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो हजार सालों के अधिकांश कालखंड में भारत और चीन दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियां थीं। अब इस शताब्दी में हम फिर से साथ-साथ उस स्थिति को प्राप्त कर रहे हैं। शी ने कहा कि वह मेहमाननवाजी से बहुत अभिभूत हैं और उनके लिए यह यादगार अनुभव है। शी ने कहा कि चीनी मीडिया ने दोनों देशों के संबंधों पर बहुत कुछ लिखा है। शी ने भी पिछले साल वुहान बैठक का जिक्र किया और उसका क्रेडिट पीएम मोदी को दिया। शी ने कहा, वुहान की पहल आपने की थी और यह बहुत अच्छी कोशिश साबित हो रही है।

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