रांची। केंद्र सरकार द्वारा डीवीसी का बकाया वसूलने के लिए झारखंड के खाते से 1417.50 करोड़ रुपये काटे जाने पर झारखंड सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे केंद्र सरकार की ‘घिनौनी साजिश’ करार देते हुए पूरे राज्य में आर्थिक नाकेबंदी करने की चेतावनी दी है। शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इससे केंद्र और राज्य सरकार के बीच खटास बढ़ेगी। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि केंद्र सरकार जीएसटी का मुआवजा देने में सक्षम नहीं है और राज्यों को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने राज्य के खजाने से कटौती कर ली। केंद्र सरकार का यह कदम साबित करता है कि वह झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है और यह उसकी घिनौनी साजिश है। केंद्र ने आजादी के बाद दूसरी बार और झारखंड के साथ पहली बार इस शक्ति का इस्तेमाल किया है। सीएम ने कहा कि राज्य की स्थिति डावांडोल है और यह केंद्र सरकार को पता भी है।
सीएम ने कहा कि गुरुवार रात को ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पत्र भेजा और टेलीफोन पर बातचीत की थी। इसमें उन्होंने जीएसटी के पैसे के लिए लोन लेने की बात कही और शुक्रवार को इस तरीके से राज्य सरकार के खजाने से पैसे निकाल लिये। एक तरफ राज्य के खाते से सीधे पैसे निकाल लिये जा रहे हैं और दूसरी ओर लोन लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया पर हमारा बहुत बकाया है, लेकिन हमने कभी उनका कोयला नहीं रोका। डीवीसी हमारे पानी का उपयोग करता है, लेकिन हमने तो उसे नहीं रोका।
सीएम ने कहा कि झारखंडियों ने आर्थिक नाकेबंदी का उदाहरण भी दिखाया है। राज्य की जनता ऐसे हालात पर और ऐसे सौतेले व्यवहार पर फैसला लेगी। जरूरत पड़ी तो हम कड़े कदम उठायेंगे। इस विषय पर मैं प्रधानमंत्री से बात भी करूंगा। पत्र भी लिखूंगा। पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज करूंगा और न्याय के लिए जो भी उचित प्लेटफॉर्म होगा, उसका उपयोग करूंगा। अपना अधिकार लेकर रहेंगे।
क्या है पूरा मामला
केंद्र सरकार के निर्देश पर रिजर्व बैंक ने झारखंड सरकार के खाते से डीवीसी के बकाये का एक किस्त 1417.50 करोड़ रुपये (25 प्रतिशत) काट लिया है। रिजर्व बैंक ने राज्य के खाते से इंटर एकाउंट ट्रांसफर द्वारा राशि काटकर ऊर्जा मंत्रालय को दे दी है। डीवीसी का झारखंड ऊर्जा विकास निगम पर 5608 करोड़ रुपये बकाया है। पिछले माह केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने डीवीसी के बकाया मद की यह राशि 26 सितंबर तक चुकाने का नोटिस राज्य सरकार को दिया था, अन्यथा किस्तों में राशि काटने की चेतावनी दी थी।
अब आगे क्या होगा
केंद्र सरकार ने पहली किस्त की कटौती करने के बाद कहा है कि नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद यह निर्णय किया गया है। सरकार को आत्मनिर्भर भारत के तहत ऋण लेकर डीवीसी का भुगतान करने का सुझाव दिया गया था। बकाया चार समान किस्तों में कटेगीा इसके मुताबिक अगली किस्त अगले वर्ष जनवरी, अप्रैल और जुलाई में वसूली जायेगी।
राज्य सरकार के खाते से राशि काटना गलत : रामेश्वर उरांव
राज्य के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने राज्य सरकार के खाते से रकम काटने को पूरी तरह से गलत और नाजायज बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में झारखंड जैसे आदिवासी बाहुल्य और पिछड़े राज्य को सहायता देने की जगह इस तरह की कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऊर्जा विभाग ने गलत कार्रवाई बताया
ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अविनाश कुमार ने राशि वसूलने की कार्रवाई को गलत करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौर में राज्य आर्थिक मंदी के दौर से गुजरते हुए उससे जूझ रहा है। राज्य सरकार ने इस बाबत केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से अनुरोध किया था। डीवीसी के साथ बकाये को लेकर विवाद भी है। इस पर निर्णय किये बगैर राशि की वसूली ठीक नहीं है।
आजादी के बाद दूसरी बार हुई है ऐसी कटौती
कश्मीर, तेलंगाना आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु पर 60 हजार करोड़ से अधिक बकाया है, पर ऐसी कटौती नहीं की गयी है। आजादी के बाद से देश में किसी राज्य के खाते से इस तरह की कटौती का यह दूसरा उदाहरण है। पहली बार आंध्रप्रदेश से कटौती हुई थी।
राज्य की वित्तीय स्थिति चरमरायी
रिजर्व बैंक के इस कदम से राज्य की वित्तीय स्थिति अचानक चरमरा गयी है। राज्य के खजाने में अब केवल 513 करोड़ रुपये ही बचे हैं। स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बाजार से एक हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए आवेदन किया है। बता दें कि पिछले छह अक्टूबर को राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लेकर किसी तरह स्थिति को संभाला था। समेकित निधि खाते में कर राजस्व, गैर कर राजस्व, केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और केंद्रीय अनुदान की राशि होती है। इस राशि का उपयोग राज्य विकास योजनाओं में करते हैं। मौजूदा समय में यदि इस राशि में कटौती होती है, तो इसका सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। कोरोना के दौर में राज्य सरकार के तमाम आर्थिक स्रोत थमे हुए हैं। ऐसे में यह कटौती भारी पड़ेगी।

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