देश में 16 जनवरी 2021 से शुरू हुए कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के तहत अब तक 92,63,68,608 (92.63 करोड़) वैक्सीन डोज लगाई गई है। देश के वैक्सीनेशन अभियान को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सिर्फ 7 फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जो कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 7 प्रतिशत भारतीय वयस्क वर्तमान में कोविड -19 के खिलाफ वैक्सीन लेने से हिचकिचा रहे हैं। ये देश में अब तक का सबसे कम वैक्सीन हिचकिचाहट स्तर है।
ऑनलाइन कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल द्वारा किए गए रिसर्च को भारत के 301 जिलों में 12,810 नागरिकों पर किया गया है। जिसमें से 67 प्रतिशत पुरुष और 33 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। रिसर्च के दौरान वैक्सीन लेने में झिझक रहे लोगों से टीका नहीं लगवाने के कारणों के बारे में भी पूछा गया है। उनसे ये समझने की कोशिश की गई है कि आखिर वह वैक्सीनेट क्यों नहीं होना चाहते हैं।
बता दें कि भारत में 94 करोड़ की वयस्क आबादी है और लगभग 68 करोड़ लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज ले ली है। स्थानीय सर्किल्स के संस्थापक सचिन टापरिया ने कहा कि प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि कुल 46 प्रतिशत अशिक्षित नागरिक जल्द ही अपनी पहली खुराक लेने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि 27 प्रतिशत नागरिक ऐसे थे जिन्होंने अभी तक वैक्सीन लेने की योजना नहीं बनाई है। उनका मानना है कि वे इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि क्या वर्तमान में उपलब्ध वैक्सीन कोरोना वायरस के वर्तमान और भविष्य के लिए सुरक्षित है या नहीं। ये 27 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो भारत के ग्रामिण इलाकों में रहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अगल वैक्सीन को लेकर डेटा अधिक उपलब्ध होता है तो वह वैक्सीन लेने पर विचार कर सकते हैं।
सचिन टापरिया ने कहा, “अगर भारत की पूरी वयस्क आबादी को ध्यान में रखा जाता है, तो सर्वेक्षण से पता चलता है कि उनमें से केवल 7 प्रतिशत ही ऐसे लोग हैं जो वैक्सीन लेने में हिचकिचा रहे हैं। यदि ये प्रतिशत 26 करोड़ वयस्कों की अशिक्षित आबादी पर लागू होते हैं, तो यह 7 करोड़ नागरिकों के बराबर है जो अभी भी वैक्सीन नहीं लेना चाहते हैं।”