परेशानी : पीएम केयर्स फंड से बच्चों को नहीं मिल पायेगा लाभ
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। कोरोना के कारण अपने माता और पिता दोनों को खो चुके राज्य के 106 अनाथ बच्चों में से 86 बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन का लाभ नहीं मिलेगा। इसका कारण यह है कि इनके पास अपने अभिभावकों की मृत्यु कोविड से होने का सर्टिफिकेट ही नहीं है, जबकि इस योजना का लाभ पाने के लिए यह प्रारंभिक और अनिवार्य शर्त है।
आॅनलाइन आवेदन भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन की गाइडलाइन के अनुसार 18 वर्ष से कम वैसे बच्चे, जिन्होंने कोविड के दौरान अपने माता और पिता दोनों, सरवाइविंग पैरेंट्स या गोद लिये हुए अभिभावकों को खोया है, उन्हें 23 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 10 लाख रुपये मिलेंगे।
18 वर्ष की उम्र तक ऐसे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, भोजन और अन्य सभी आवश्यकता की चीजें मुफ्त दी जायेंगी। समाज कल्याण विभाग को जो सूचना मिली है, उसके अनुसार माता-पिता दोनों को खोनेवाले बच्चों में से सिर्फ 20 बच्चों को ही उनके पैरेंट्स के कोविड से मृत्यु होने का सर्टिफिकेट मिला है। बगैर सर्टिफिकेट के पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन का फॉर्म आॅनलाइन अपलोड नहीं हो सकता।
मौत का कारण कोविड दर्ज है, पर प्रमाणपत्र नहीं मिला
यह अपने आप में एक विडंबना है कि विभाग की फाइलों में मौत का कारण कोविड को बताया गया है, पर उन्हें सर्टिफिकेट नहीं मिला है। पंचायत के मुखिया, गांवों के वार्ड सदस्य, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका और पंचायत सचिवों की अनुशंसा पर यह सूची तैयार हुई है। इन्होंने अपनी अनुशंसा में बताया है कि अस्पतालों में ये सभी कोरोना के कारण भर्ती हुए थे, जहां उनकी मृत्यु हुई।
सभी डीसी मदद करें : निदेशक
समाज कल्याण निदेशक नमन प्रियेश लकड़ा ने सभी डीसी को कहा है कि वे सर्टिफिकेट बनवाने में मदद करें। लकड़ा ने कहा कि अगर अस्पताल से सर्टिफिकेट मिलने में दिक्कत हो तो पंचायत के मुखिया, पंचायत सेवक या आंगनबाड़ी सेविका के दिये सर्टिफिकेट को मानने का आग्रह किया जायेगा।
अनाथ हुए बच्चों का जिलावार आंकड़ा
रांची में 24, बोकारो में 08, चतरा में 02, देवघर में 02, धनबाद में 01, दुमका में 04, पू. सिंहभूम में 06, गिरिडीह में 04, गोड्डा में 01, गुमला में 10, हजारीबाग में 03, जामताड़ा में 02, खूंटी में 11, लातेहार में 01, लोहरदगा में 06, पलामू, रामगढ़ में 04, सरायकेला में 1, प. सिंहभूम में 07, इसमें कोडरमा, सिमडेगा, पलामू, गढ़वा और साहेबगंज का आंकड़ा नहीं मिल पाया है।