बड़कागांव। अडाणी कंपनी को आवंटित बड़कागांव प्रखंड के गोंदलपुरा कोल ब्लॉक के अधिग्रहण को लेकर सामाजिक समाधान निर्धारण अध्ययन एसआइए हेतु ग्राम सभा का आयोजन 10 अक्टूबर को बलोदर, 12 अक्टूबर को गाली एवं 18 अक्टूबर को गोंदलपुरा पंचायत भवन में निर्धारित की गयी थी। इसके पहले दिन ग्रामीणों के मौन विरोध के बाद जनसभा नहीं हो पायी और पदाधिकारी बैरंग वापस लौट गये। ठीक उसी तरह 12 अक्टूबर को गाली गांव के स्कूल में आयोजित ग्राम सभा स्थल से डेढ़ किलोमीटर पहले ही ग्रामीण सड़कों पर विरोध में तख्तियां लेकर बैठे रहे। ग्रामीणों के मौन विरोध के बाद पदाधिकारी वापस लौट गये। बताते चलें कि सभास्थल तक अडाणी कंपनी के पदाधिकारी ना पहुंच सकें, इसके लिए ग्रामीण 2:00 बजे रात से ही सड़क पर बैठ कर अधिकारियों का विरोध करने के तैयार थे।
तख्तियों में लिखा हुआ था
अडाणी कंपनी द्वारा आयोजित गाली की ग्रामसभा रद्द करो, अडाणी कंपनी वापस जाओ, हमारा गांव में हमारा राज, खेती हमें खिलाती है खदान हमें खाता है, जल जंगल जमीन हमारा है, अडाणी कंपनी के दलालों होश में आओ, किसानों एवं ग्रामीणों का विस्थापन करना बंद करो, विकास के नाम पर प्रकृति को बर्बाद करना बंद करो आदि।
हालांकि मौके पर मौजूद नाबार्ड पदाधिकारी प्रणय कुमार, अडाणी जीएम डी दुबे, कार्यपालक पदाधिकारी सह दंडाधिकारी नवीन भूषण कुल्लू, कानूनगो सुनील कुमार सिंह आदि ने बारी-बारी से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और कहा कि आप लोगों ने सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच होने वाले सामाजिक अंकेक्षण के दौरान सहयोग कर सभी ने सर्वे कराया, साथ ही साथ अपने छूटे हुई बात को पूरा करने के लिए टेलीफोन का भी सहारा लिया और हमें सहयोग किया, ठीक उसी तरह आप लोग अपनी बात को हम लोगों के समक्ष रखें, क्योंकि अभी आपकी भूमि अधिग्रहण नहीं होगी। नियम के तहत पहले यधियाचना होगी, पुनर्वास नीति बनेगी, उसके बाद जनसुनवाई होगी, तब अधिग्रहण का कार्य किया जायेगा। इस बीच आप अपनी बातों को मौखिक एवं लिखित हम लोगों तक पहुंचायें, ताकि उस पर विचार कर आप लोगों के हित में कार्य किया जा सके। लेकिन ग्रामीणों के मौन के कारण कोई भी व्यक्ति कुछ भी कहने से या बताने से इनकार किया। यहां तक कि जब पत्रकारों ने भी विरोध पर बैठे ग्रामीणों से कुछ जानकारी लेनी चाही, तो मौन विरोध के नियमों का उल्लंघन ना कर कुछ भी बताने से इनकार किया तथा इशारे इशारे में बताया कि हम लोगों की मांग तख्तियों में अंकित है।