उज्जैन। हर साल की तरह इस साल भी देश में सबसे पहले महाकालेश्वर मंदिर में दिवाली मनाई गई। रूप चौदस और दीपावली का पर्व एक ही दिन होने के चलते सोमवार को सुबह भस्मारती में बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया, फिर चंदन का उबटन लगाया गया। सुबह होने वाली भस्म आरती में पुजारियों ने बाबा महाकाल की फुलझड़ियों से आरती की। इस मौके पर मंदिर को खूबसूरत फूलों से सजाया गया है।

महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्मारती के बाद बाबा को दूध, दही, घी, शक्कर, केशर, चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल से स्नान करवाया गया। इसके बाद राजसी श्रृंगार के आभूषण पहनाए गए। बाबा को अन्नकुट नैवेद्य लगाकर फुलझड़ी चलाई गई। से अभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद भांग, चन्दन, सूखे मेवे, सिंदूर आभूषण से मनमोहक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को अन्नकूट नैवेद्य लगाकर फुलझड़ी चलाई गई। 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण होने से सोमवार को ही महाकालेश्वर मंदिर में रूप चतुर्दशी और दीपावली का अन्नकूट लगाया गया।

दीपावली पर बाबा महाकाल को 56 प्रकार के व्यंजन भोग में अर्पित किए गए। इस मौके पर मंदिर के गर्भगृह, नंदी हॉल में फूलों से आकर्षक सजावट की गई है। बड़ी संख्या में भक्त दीपावली मनाने के लिए महाकालेश्वर मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर में आकर्षक लाइटिंग भी दर्शनार्थियों का मन मोह रही है।

उल्लेखनीय है कि देश में सभी त्यौहारों की शुरुआत महाकाल मंदिर से होती है। इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए सोमवार को यहां दीपावली पर्व सबसे पहले मनाया गया।

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