- पिछली सरकार ने तीन से घटा कर दो अंडा कर दिया था
- 32 लाख बच्चों का स्वास्थ्य सुधरेगा
रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को अब हफ्ते में पांच दिन अंडा मिलेगा। जो बच्चे अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें सरकार फल देगी। इसे लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारी कर ली है। इस पहल से सरकारी स्कूलों के 32 लाख बच्चों को का स्वास्थ्य सुधरेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही कह चुके हैं कि राज्य सरकार बच्चों को पौष्टिक आहार देकर उनके स्वास्थ्य को बेहतर करना चाहती है। सितंबर माह की कैबिनेट बैठक में फैसला हुआ था कि पीएम पोषण शक्ति निर्माण के तहत सरकार सप्ताह में दो दिन की जगह पांच दिन अंडा देगी। बता दें कि देश के कई राज्यों जैसे-कर्नाटक, तेलंगाना और ओड़िशा के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील के तहत चावल, दाल, सब्जी के साथ अंडा मिलता है।
क्यों दिया जाना है अंडा
सरकारी स्कूल में सभी बच्चों को अंडा देने का उद्देश्य यह है ताकि स्कूल में बच्चे रोजाना आयें और उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता रहे। इससे कुपोषण जैसी समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। अर्थशास्त्री ज्या द्रेंज ने बीते दिनों सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव को एक पत्र लिखा था। उसमें कहा था कि स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को हर दिन एक-एक अंडा दिया जाये। उन्होंने बताया था कि स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी कम है। जो आते हैं, उनमें भी कुपोषण की संख्या ज्यादा है। ऐसे में जरूरी है कि सभी बच्चों को एक-एक अंडा दिया जाये। इससे बच्चों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ेगी। साथ ही बच्चों का स्कूल आने के प्रति रूझान भी बढ़ेगा।
रघुवर कार्यकाल में अंडा तीन से घटा कर दो हो गया था
झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों को वर्तमान में सप्ताह में दो दिन अंडा दिया जा रहा है। रघुवर सरकार में पहले अंडा तीन दिन मिलता था। एक अंडे की कीमत चार रुपये थी। बाद में अंडा का दाम बढ़ कर छह रुपए हो गया। तब रघुवर सरकार ने तीन दिन की जगह दो दिन ही अंडा देने का फैसला किया। अब अंडे को प्रतिमाह पांच दिन किया जा रहा है।
पांच दिन अंडा देने पर सरकार को खर्च करना होगा 400 करोड़
मीड डे मील योजना के तहत भोजन देने में केंद्र और राज्य सरकार का हिस्सा 60 : 40 है। अंडा देने का पूरा खर्च स्वयं राज्य सरकार उठाती है। रघुवर सरकार से अब तक हफ्ते में दो दिन अंडा देने में सरकार करीब 175 करोड़ रुपये खर्च करती है। वहीं अब पांच दिन देने से यह खर्च बढकर 400 करोड़ के आसपास होने का अनुमान है।