जानकारों का मानना है कि तीन कप बता रहे हैं कि मौत से पहले बुर्ज पर चेतन के अलावा दो या तीन व्यक्ति और मौजूद होंगे, या हो सकता है कि उन्होंने साथ चाय भी पी हो। किले पर शहर से प्लास्टिक थैली में चाय लेकर आना मुश्किल है। इससे संभावना है कि यह चाय किले पर ही खरीदी होगी।नाहरगढ़ की पहाड़ी पर चरण मंदिर और टीवी टॉवर के आसपास कुछ लोग देर शाम तक चाय बेचने का काम भी करते हैं। जहां से आसानी से चाय उस बुर्ज तक लाई जा सकती है। इन सवालों के ठोस जवाब फिलहाल पुलिस के पास नहीं है। यदि वहां चाय पी गई तो इन तीनों कपों और प्लास्टिक की थैली को बुर्ज पर फेंकने के बजाए चेतन के जूते में व्यवस्थित तरीके से रखना, अपने आप में सवाल उठा रहा है।
एक और अहम सवाल कि सुसाइड करने वाला एक जूता पहनकर ही क्यों सुसाइड करेगा। वह एक जूता बुर्ज पर क्यों उतारेगा। इसी तरह, वहां मौत से पहले सब कुछ व्यवस्थित था। जैसे कि इतने पत्थरों पर कोयले से लिखना। लेकिन घिसे हुए कोयले के टुकड़े वहां नहीं फैलाना। जिन पत्थरों पर पद्मावती और काफिरों को लेकर विवादित अंश लिखे गए, उनमें खास है कि एक शब्द भी पत्थर के बाहर नहीं गया और पत्थर के आकार के अनुसार ही उस पर छोटा-बड़ा मैसेज लिखा गया। इसी बुर्ज पर करीब 25 पत्थरों पर पद्मावती फिल्म को लेकर विवादित बातें कोयलें से लिखी गई थीं।
इन तथ्यों से यह सवाल खड़ा होता है कि खुदकुशी से पहले चेतन ने इतना सबकुछ क्यों किया। वह आर्थिक तंगी, गृहक्लेश या फिर किसी और कारण से खुदकुशी करता तो ऐसी विवादित टिप्पणियां क्यों लिखता?