नई दिल्ली: नोटबंदी लागू होने के एक साल पूरे होने पर आठ नवंबर बुधवार को सत्ता पक्ष जहां कालाधन विरोधी दिवस मनाते हुए दिन भर नोटबंदी के फायदे गिनाए और अपनी वाहवाही की वहीं विपक्षी दलों ने जनता को हुई तकलीफों का जिक्र करते हुए काला दिवस मनाया.
कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने नोटबंदी का कोई मकसद हासिल न होने को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इस नाकाम निर्णय के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए वहीं वामदलों ने कहा है कि मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान मारे गए गए लोगों की मौत का जश्न मना रही है.
प्रदर्शन में माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि मोदी सरकार ने दो रिकार्ड कायम किए. पहला, जनता को कतारों में खड़े होने को मजबूर कर दिया और दूसरा देश दुनिया को नोटबंदी से कालाधन वापस लाने का भरोसा दिलाया. जबकि हकीकत में उन्होंने नोटबंदी के दौरान कालाबाजारी करने वालों को कालेधन को वैध बनाने में मदद की.
करात ने कहा कि “भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब कोई सरकार अपने नागरिकों की मौत और परेशानियों का जश्न मना रही है”.
भाजपा इसे कालाधन विरोधी दिवस के रूप में मना रही है इसके फायदों से जनता को अवगत कराने के लिए देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं
विरोध प्रदर्शन में शिरकत करते हुए भाकपा नेता अतुल अनजान ने कहा कि नोटबंदी के बाद किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हुए हैं और नौजवान अपनी नौकरी गंवा रहे हैं.
इस मौके पर भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि नोटबंदी और इसके बाद जीएसटी ने आर्थिक तबाही कर दी. इससे न तो रोजगार के अवसर पैदा हुए ना ही आर्थिक वृद्धि हुई.
सभी छह वामदलों भाकपा, माकपा, फारवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, भाकपा माले और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया ने नोटबंदी के विरोध में आयोजित सामूहिक प्रदर्शन में हिस्सा लिया.