रांची। 67000 पारा शिक्षकों की सेवा नियमित करने की मांग को लेकर पारा शिक्षक 15 नवंबर को स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने के निर्णय पर अडिग हैं। मुख्यमंत्री ने समारोह में विरोध या व्यवधान डालने वाले पारा शिक्षकों को बर्खास्त करने का आदेश दिया है। इसकी परवाह नहीं करते हुए पारा शिक्षक समारोह में शामिल होने के लिए बुधवार को ही रांची पहुंच गये। झारखंड एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बजरंग प्रसाद, संजय दुबे ने यह जानकारी दी।
घोषणा नहीं होने की स्थिति में काला झंडा दिखाएंगे
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पारा शिक्षकों को नियमित करने की घोषणा समारोह में की जाती है तो स्वागत किया जायेगा। घोषणा नहीं होने की स्थिति में काला झंडा दिखाकर विरोध जतायेंगे। मोर्चा के बिनोद बिहारी महतो, हृषिकेश पाठक, बजरंग प्रसाद, शिंटू सिंह, मोहन मंडल, नरोत्तम सिंह मुंडा, दशरथ ठाकुर ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई लेबल कमेटी बनी थी, लेकिन पारा शिक्षकों को नियमित नहीं किया गया। इससे पारा शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।
आठ हजार में कैसे चल सकता है परिवार
संघर्ष मोर्चा के बजरंग प्रसाद ने बताया कि राज्य के पारा शिक्षकों को सिर्फ आठ हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है। ऐसे में परिवार कैसे चल सकता है। 16 वर्ष तक सेवा देने के लिए सम्मान जनक मानदेय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं दूसरे राज्यों के शिक्षकों की सेवा को नियमित करते हुए मानदेय दिया जा रहा है। मोर्चा के रांची जिले के महासचिव मो शकील ने सरकार एवं पुलिसिया कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। सेवा नियमित की घोषणा नहीं हुई तो मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाया जायेगा।
356 और 234 रुपये बढ़ाने का विरोध
संघर्ष मोर्चा ने मानदेय में बहुत कम रुपए बढ़ाए जाने का विरोध किया है। कहा है कि अपग्रेड मिडिल स्कूल के पारा शिक्षकों को 356 रुपए बढ़ाये गये हैं। वहीं, प्राथमिक स्कूल में पढ़ा रहे पारा शिक्षकों को 234 रुपये बढ़ाये गये हैं। संघर्ष मोर्चा के राज्य एवं जिला कमेटी के सदस्यों के गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है। इसे पारा शिक्षकों ने लोकतंत्र की हत्या बताया है। मोर्चा ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई स्थगित करते हुए पारा शिक्षकों की डिमांड पर निर्णय लेने का अनुरोध किया है।