संतोष सिन्हा
बालूमाथ। लातेहार विधानसभा क्षेत्र में 30 नवंबर को पहले चरण के होने जा रहे विधानसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, चुनावी समर में दो-दो हाथ करने को उतारू नेताओं के पसीने तेजी से छूट रहे हैं। यह पसीना नेताजी का गर्मी से नहीं छूट रहा है, बल्कि जनता उनका पसीना छुड़ा रही है। आश्वासनों के कोरे भंवरजाल में रखे नेता जी वोट मांगने पहुंच रहे हैं, तो जनता इतनी नाप-तौल कर रही है कि वे अपना पलड़ा झुका समझ स्वयं की पीठ थपथपा कर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन उन्हें शायद यह पता नहीं कि जनता उन्हें वोट रूपी खंजर भी भोंक सकती है।
जनता अब इतनी तेज हो गयी है कि जो कोई वोट मांगने जा रहा है, उसको पहले से ही आपके साथ होने की बात कहती है। दूसरा भी जाता है तो उसी प्रकार का बर्ताव कर रहे हंै। किसको करे जनता अपनी वाणी से नाराज, शायद यही समझकर उनका आदर सत्कार में कोई कमी नहीं करती।
इस बार बड़ी चालाकी से काम ले रही है जनता
बालूमाथ, चंदवा, बारियातू, हेरहंज और लातेहार की जनता इस बार बड़ी चालाकी से काम ले रही है। मतदान के लिए पूरी तरह से अपना मूड बना चुकी है। इसी मूड को भांपने के लिए नेताजी निकल रहे हैं। ठंड के बीच चिलचिलाती धूप में धान की कटनी करके आराम फरमा रहे लोगों की नेताओं की धमा चौकड़ी से नींद भी हराम हो गयी है। कहीं-कहीं तो लोग अटपट भी बोल दे रहे हंै कि आप लोग तो जीत के जाने के बाद गांव उलट कर नहीं देखते हैं, कतो विकास कैसे कीजियेगा नेता जी। गांवों में दिन ही नहीं, रात में भी नेताओं की चहलकदमी जारी है।
कई जगहों पर प्रत्याशियों को करना पड़ रहा विरोध का सामना
दस दिन की भागदौड़ वाले दिन-रात में नेताजी जनता को उल्लू बनाकर किसी प्रकार कुर्सी हथियाने के होड़ में लग गये हैं, जिससे उनकी भूख-प्यास भी मिट गयी है। देखना अब यह है कि जनता इन्हें चुनावी स्वाद किस प्रकार चखाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क करने में राजनीतिक पार्टियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि ऐसी कठिन परिस्थितियों में नेता किस तरह जनता को अपने पक्ष में करने में कामयाब होते हैं। कई जगहों पर तो प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं को जनता के विरोध का सामन भी करना पड़ रहा है। जनता प्रत्याशियों से पूछ रही है कि आपलोगों को हमलोग सिर्फ चुनाव के समय ही याद आते हैं।