अजय शर्मा
रांची। झारखंड के दागी आइपीएस अफसरों की सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मांगी है। इस संबंध में मुख्य सचिव डीके तिवारी को पत्र भेजा गया है। केंद्र ने देश के सभी सीएस को पत्र भेजा है। इसे दागी अफसरों को सेवा से बाहर करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके पहले भी केंद्र सरकार अखिल भारतीय सेवाओं के करीब डेढ़ सौ अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दे चुकी है। झारखंड में पत्र मिलने के बाद यहां के अधिकारी आइपीएस अधिकारियों की कुंडली खंगालने में जुट गये हैं। सेवानिवृत्त और कार्यरत दोनों तरह के अधिकारियों के बारे में पूरी जानकारी मांगी गयी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि जिनके विरुद्ध निगरानी में मामले दर्ज हैं, उनके संबंध में भी जानकारी दें। साथ ही जिनके विरुद्ध आपराधिक मामले, कोर्ट केस, अनुशासनात्मक कार्रवाई या कोई दूसरी तरह की जांच चल रही है, तो उस संबंध में पूरी जानकारी चाहिए। राज्य बनने के बाद झारखंड कैडर के कई अधिकारी विवाद में आये। आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए। अभी भी 18 आइपीएस अधिकारियों के खिलाफ मामले लंबित हैं। झारखंड के मुख्य सचिव को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निदेशक एके सैनी द्वारा पत्र भेजा गया है। यह पत्र 13 नवंबर को झारखंड के सीएस को मिला है।
आइपीएस अफसरों की कुंडली खंगाल रहा केंद्र
भारत सरकार अलग-अलग राज्यों में पदस्थापित आइपीएस अधिकारियों की पूरी सूची मंगा रही है। वैसे अधिकारी, जिनके विरुद्ध गंभीर आरोप हैं या आरोप प्रमाणित हो गये हैं, उन्हें सेवा से बाहर किया जा सकता है। इस पत्र के बाद झारखंड के अधिकारियों में तरह-तरह की चर्चा है।
अलग-अलग एजेंसी से मांगी गयी है रिपोर्ट
झारखंड के एंटी करप्शन ब्यूरो को अलग से पत्र भेजकर मुख्य सचिव कार्यालय ने पूरी जानकारी मांगी है। एसीबी 13 अधिकारियों के विरुद्ध जांच कर रही है। चार अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में मामला लंबित है। दो अधिकारी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपी हैं।
मोदी 2.0 का बड़ा कदम है यह कवायद
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में नौकरशाही को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जून में ही अभियान शुरू किया गया था। इसके तहत सभी केंद्रीय विभागों से कहा गया था कि वे अपने यहां के दागी अधिकारियों और कर्मियों की सूची तैयार करें। इसके अलावा नीचे से लेकर ऊपर तक के बाबुओं की कार्यशैली और अन्य आचरणों की तीन महीने पर समीक्षा करें। तय मापदंड पर जो कर्मी खरे नहीं उतरें, उन्हें वीआरएस दे दिया जाये। केंद्र सरकार के फैसले के अनुरूप उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में राज्य सेवाओं के अधिकारियों के कामकाज की गहन समीक्षा की जा रही है।

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