नई दिल्ली: एक महीने से सरकार गठन को लेकर चल रही सुगबुगाहट शनिवार की सुबह अचानक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में तब्दील हो गई। सुबह ही देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और एनसीपी के नेता अजित पवार ने डेप्युटी सीएम पद की शपथ ली तो महाराष्ट्र समेत पूरे देश की राजनीति में भूचाल सा आ गया। अब तक शिवसेना, कांग्रेस के साथ सरकार का हिस्सा का बनने की योजना बना रही एनसीपी के लिए यह सबसे बड़ा झटका था। यह इसलिए भी चिंता की बात थी क्योंकि फूट सिर्फ पार्टी में ही नहीं बल्कि पवार फैमिली में भी थी। शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने एनसीपी विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपकर शपथ ली थी।
इसके बाद बयानों का दौर शुरू हुआ और कांग्रेस का ही एक वर्ग इसके पीछे शरद पवार को जिम्मेदार बताने लगा। हालांकि इस बीच शरद पवार ने साफ किया कि यह अजित पवार ने निजी तौर पर फैसला लिया है। एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और तमाम बीजेपी नेताओं तक ने सीएम और डेप्युटी सीएम की शपथ पर देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को बधाई दे डाली तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या बताने लगा। इस बीच सबसे ज्यादा चिंता मराठा योद्धा कहे जाने वाले शरद पवार के माथे पर दिखी। उन्होंने शाम को ही विधायकों की बैठक बुलाई।
शरद पवार ने दिखाया दम, 49 विधायकों की हाजिरी
माना जा रहा था कि इससे ही साफ हो जाएगा कि अजित पवार के साथ कितने लोग हैं औऱ शरद पवार के खेमे में कितने विधायक हैं। शाम को जब एनसीपी की बैठक शुरू हुई तो 42 विधायक मीटिंग में पहुंचे। पार्टी का कहना था कि 7 अन्य संपर्क में हैं यानी शरद पवार के साथ कुल 49 विधायकों ने हाजिरी लगाई। हालांकि अजित पवार समेत 5 विधायक नहीं दिखे।
सुबह अजित ने दिया झटका, शाम को पवार का ऐक्शन
पार्टी के विधायकों ने प्रस्ताव पारित किया और अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाते हुए पवार ने अपने विश्वस्त जयंत पाटील को यह जिम्मा दे दिया। कहा जा रहा है कि पवार ने इस ऐक्शन के बाद कांग्रेस और शिवसेना के नेतृत्व को फोन कर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। बैठक के तुरंत बाद ही सभी 49 विधायकों को रैनसॉ होटल में पहुंचा दिया गया। दूसरी तरफ शिवसेना के 56 विधायक भी ललित होटल में मौजूद हैं। यही नहीं कांग्रेस भी अपने विधायकों को जयपुर में शिफ्ट कर सकती है।