रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण की कोर्ट ने शनिवार को अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। अदालत टिप्पणी करते हुए कहा कि यहां अफसर चाहते ही नहीं है कि रांची अतिक्रमण मुक्त हो । अदालत प्रिंस आजमानी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अजमानी के अधिवक्ता रोहित सिन्हा ने अदालत को बताया कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के प्रावधान के अनुरूप अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन नहीं होने से वहां विवादित मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने नगर विकास सचिव को कंटेंप्ट नोटिस जारी कर दिया। अदालत में कहा कि नगर विकास विभाग की ओर से अदालत में शपथ पत्र देकर जानकारी दी गई थी कि अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित हो चुका है। इसमें सुनवाई हो रही है। जबकि आज कोर्ट को यह बता रहे हैं कि अभी ट्रिब्यूनल कार्यरत नहीं है।

अदालत में कहा कि सरकार के शपथ पत्र को सच मानते हुए हाईकोर्ट ने इससे जुड़े कई मामले ट्रिब्यूनल को रेफर कर दिया था। जबकि साथ आज सामने आया कि वहां ट्रिब्यूनल कार्यरत ही नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार के गलत शपथ पत्र से कोर्ट दिग्भ्रमित हुई है। गलत शपथ पत्र पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अदालत ने अधिवक्ता और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिवक्ता को अपना जवाब शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नगर विकास विभाग के सचिव से पूछा है कि गलत शपथ पत्र देने के लिए क्यों नहीं उनके खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की प्रोसिडिंग शुरू की जाए । मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी।

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