रांची। सरना धर्म कोड की मांग को लेकर 11-12 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महाधरना दिया जायेगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय आदिवासी समाज, सरना धर्म रक्षा अभियान के बैनर तले किया जा रहा है। इसमें देश भर के आदिवासी भाग लेंगे। महाधरना में शामिल होने के लिए केंद्रीय सरना संघर्ष समिति और आर्दश सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासियों का जत्था स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस ट्रेन से बुधवार को दिल्ली रवाना हुआ।
जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला भगत ने कहा कि आदि काल से रहने वाले को उनके धर्म की पहचान न मिलना एक साजिश है। जब तक धर्म की आजादी नहीं मिल जाती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि आजादी के बाद भी अब तक सरना धर्म कोड नहीं दिया गया। इसका खमियाजा पूरे आदिवासी समाज को भुगतना पड़ रहा है। आदिवासी राजनीति के शिकार होते आए हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी सरना धर्म कोड लागू करने का प्रस्ताव भेजे जाने के एक वर्ष बाद भी केंद्र सरकार द्वारा अब तक इसको लेकर कोई पहल नहीं होने के विरोध में दिल्ली कूच की जा रही है। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों झारखंड, छातीसगढ़, ओड़िशा, प बंगाल, असम, बिहार, गुजरात, यूपी, एमपी के सरना धर्मावलंबियों के प्रतिनिधि महाधरना में सम्मिलित हो रहे हैं। धरना के बाद अपनी मांग के संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
महाधरना में शामिल होने के लिए आदिवासियों का जत्था दिल्ली रवाना
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