गुमला/सिसई। लोकतंत्र के महापर्व में शनिवार को सिसई विधानसभा क्षेत्र में जहां 68.80 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, वहीं एक युवक की मौत हो गयी। सुबह से ही 332 मतदान केंद्रों पर भीड़ लगने लगी थी। इसी क्रम में सुबह नौ बजे के करीब बघनी गांव के बूथ नंबर 35 पर हंगामा होने लगा। लाइन में खड़े एक युवक वहां तैनात जवान से उलझ गया। बात बढ़ती गयी। तब ग्रामीणों ने जवानों को घेर लिया। तब एक जवान ने उस युवक की जांघ में गोली मार दी।
गोली चलने की खबर मिलते ही लोगों का हुजूम वहां उमड़ पड़ा। तब तक बूथ पर मतदान रोक दिया गया था। हंगामा शांत करने के उद्देश्य से सिसई के थाना प्रभारी विष्णुदेव चौधरी वहां पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन पर हमला कर दिया। लाठी-डंडे से पीट कर उन्हें भी घायल कर दिया गया। पुलिस की गोली से मारे गये युवक का नाम जिलानी अंसारी बताया जा रहा है। घायलों में अशफाक अंसारी, तबरेज अंसारी उर्फ ठुपा, रविना खातुन, रसालेहा खातुन शामिल हैं। गुस्सायी भीड़ ने थाना प्रभारी के साथ खड़े पत्रकार सीताराम साहू और नरेश जायसवाल को भी अपना निशाना बनाया।
घटना की बाबत ग्रामीणों ने बताया कि मो अशफाक वोट देने के लिए मतदान केंद्र पर गया था। इस पर लाइन सीधी करने को लेकर आरपीएफ के एक जवान के साथ उसका विवाद हुआ। जवान ने उसे लाइन से बाहर खींच लिया और घसीटते हुए बूथ से लगभग 50 मीटर दूर तक ले गया और उसकी जांघ में गोली मार दी। आरपीएफ जवान की इस हरकत से ग्रामीणों में उबाल आ गया और वे एकजुट हो गये। भीड़ बढ़ता देख गोली चलानेवाला जवान छत पर चढ़ गया और हवाई फायर करने लगा। उसके साथ छह और जवान छत पर चढ़ गये और हवा में गोलियां चलाने लगे। ग्रामीणों ने पथराव करना शुरू कर दिया। यह क्रम करीब एक घंटे तक चला। इसी बीच जिलानी अंसारी ने जवानों से फायरिंग बंद करने का आग्रह किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसने कहा कि वह ग्रामीणों को समझा रहा है। तभी एक जवान ने जिलानी पर गोली चला दी। गोली जिलानी के पेट में लगी और वह वहीं पर ढेर हो गया। ग्रामीणों ने उसे तत्काल रेफरल अस्पताल सिसई भेजा, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। तब तक माहौल बिगड़ चुका था। पुलिस रुक-रुक कर गोली चलाती रही।

जवान ने धैर्य खोया, तो हो गयी बड़ी घटना
गुमला। बघनी गांव के बूथ नंबर 35 पर आरपीएफ जवान के धैर्य खोने के कारण बड़ी घटना हो गयी। ग्रामीणों का कहना है कि अशफाक को बेवजह गोली मारी गयी। ग्रामीणो के अनुसार जवान सुबह से ही मतदाताओं को परेशान कर रहा था। अशफाक से उसका विवाद वोट किसे देना है, इसको लेकर हुआ।

महिलाएं भी लाठी-डंडा लेकर सड़क पर उतरीं
गुमला। जवानों की फायरिंग के खिलाफ गांव में आक्रोश इतना ज्यादा था कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी लाठी-डंडा लेकर पुलिस से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार थी। लेकिन जवान छत पर चढ़ कर लगातार हवाई फायरिंग कर रहे थे। इसके कारण ग्रामीण आगे बढ़ने से हिचक रहे थे। मतदान केंद्र के पश्चिमी और उत्तरी दोनों छोर पर बने रास्तों से पुलिस के जवान घिर चुके थे। फिर भी जवानों ने साहस का परिचय देते हुए ग्रामीणों को अपने पास फटकने नहीं दिया।

एसपी ने जवानों को नीचे उतारा
गुमला। घटना के लगभग एक घंटे के बाद एसपी अंजनी कुमार झा दल-बल के साथ बघनी गांव पहुुंचे। एसपी ने स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से शांत रहने की अपील की। सबसे पहले उन्होंने छत पर मोर्चा संभाले आरपीएफ के जवानों को सुरक्षित उतारा। उसके बाद बूथ नंबर 35 के कमरे में कैद सभी मतदान कर्मियों, लगभग छह मतदाताओं और इवीएम मशीन को सुरक्षित निकाला। इसके बाद उन्होंने बघनी और सिसई के अंजुमन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित लोगों के साथ बैठ कर बातचीत की। एसपी ने बघनी के सदर सफरूद्दीन अंसारी, नायब सदर इसहाक अंसारी, अंजुमन के सदस्य हसीब अंसारी से बातचीत की और मामले की असलियत को जाना। थोड़ी देर बाद सिसई के अंजुमन के पदाधिकारी घटनास्थल पर पहुंंचे और बूथ वाले स्कूल में ही उपायुक्त, एसपी और अंजुमन के पदाधिकारियों के बीच बातचीत हुई। इसमें दोषी जवानों पर कार्रवाई, मृतक के आश्रितों को मुआवजा, घायलों का मुफ्त इलाज के साथ-साथ ग्रामीणों के पक्ष से शांति सहयोग की अपील की।

माहौल को शांत करने में जुटा था जिलानी
गुमला। जवानों की गोली से मारे गये जिलानी अंसारी ग्रामीणों को लगातार पथराव करने से रोक रहा था। लेकिन जैसे ही पथराव बंद होता, जवान हवाई फायरिंग करना शुरू कर देते। इसके कारण जिलानी हाथ उठाते हुए छत पर चढ़े आरपीएफ के जवानों से गुहार लगा रहा था कि वे हवाई फायरिंग करना बंद करें, तभी पथराव पर काबू पाया जा सकेगा। लेकिन एक जवान ने जिलानी को टारगेट कर सीधे उस पर गोली चला दी। जिलानी वहीं गिर पड़ा और उसकी मौत हो गयी। ग्रामीण उसे उठाकर बूथ के किनारे ले आये।

तीन दिन पहले ही हुई है जिलानी के पिता की मौत
गुमला। आज से ठीक तीन दिन पहले जिलानी अंसारी के पिता सखावत अंसारी की मौत हुई है। महज तीन दिन के अंदर बाप और बेटे की मौत ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। जिलानी की मां सलमा खातून और पत्नी रौशन खातून का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसा भी बताया जा रहा है कि जिलानी लोहरदगा में था और ग्रामीणों ने चुनाव को लेकर उसे बुलाया था।

15 दिन में मिलेगा मुआवजा: उपायुक्त
गुमला। सीओ सुमंत तिर्की ने कहा कि मृतक के आश्रितों को तत्काल 20 हजार रुपये सामाजिक सुरक्षा कोष से दिये गये हैं। उनके यहां 50 किलोग्राम अनाज भेजा गया है। जिलानी की मां को वृद्धा पेंशन और उसकी पत्नी रौशन खातुन को विधवा पेंशन दी जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री योजना का लाभ इस परिवार को नहीं मिला है, तो वह भी मुहैया कराया जायेगा। वहीं उपायुक्त शशि रंजन ने कहा कि 15 दिनों के अंदर जांच पूरी कर मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि दिलायी जायेगी। साथ ही अन्य सुविधाएं सरकारी प्रावधानों के अनुसार मृतक के आश्रितों को दी जायेंगी। एसपी अंजनी कुमार झा ने कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया के साथ-साथ जांच में दोषी पाये जाने पर जवानों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी।

पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने का ग्रामीणों ने किया विरोध
सिसई। गोली लगने के बाद ग्रामीण जिलानी को लेकर सीधे रेफरल अस्पताल सिसई पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इधर गांव में मामला शांत होते ही ग्रामीण सिसई पहुंचे। वहां उन्होंने शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाने का विरोध कर दिया। वे जवान के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए उस पर एफआइआर दर्ज करने की बात कह रहे थे। सिसई प्रखंड मुख्यालय में घटना को लेकर बैठक भी की गयी और आगे की कार्रवाई का निर्णय भी लिया गया।

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