रांची। जुमार नदी जमीन घोटाला में कार्रवाई शुरू हो गयी है। इस मामले में कांके सीओ के खिलाफ जमीन घोटाला के मामले में कार्रवाई सुनिश्चित हो गयी। कार्रवाई पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सहमति दे दी है। रांची की जुमार नदी की जमीन पर हाउसिंग सोसाइटी बनायी गयी है। जांच में यह बात सामने आयी है कि कांके सीओ की मिलीभगत से इस सोसाइटी का निर्माण किया गया है। जुमार नदी, बीएयू और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रिवर व्यू प्रोजेक्ट तैयार करने के मामले में संदिग्ध भूमिका निभानेवाले कांके सीओ अनिल कुमार के निलंबन की फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी गयी थी। इस पर सीएम ने सहमति दे दी है। बता दें कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर रिवर व्यू प्रोजेक्ट बनाने और बेचने का मामला सामने आया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज करायी है और उपायुक्त ने भू-राजस्व विभाग को भेजी रिपोर्ट में कांके सीओ अनिल कुमार, अंचल निरीक्षक और हल्का कर्मचारी की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए उन्हें निलंबित करने और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में मामला दर्ज कराने की अनुशंसा की है।
जमीन के निर्माण पर रोक नहीं लगा सकते सीओ और एसओ : हाइकोर्ट
रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश दिया है कि सर्किल आॅफिसर (सीओ) और थानेदार को खुद के स्तर से जमीन के निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। सीओ कांके के पॉवर और क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड हाइकोर्ट ने सुनवाई करते हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने याचिका निष्पादित कर दी। प्रार्थी संदीप खन्ना एवं अन्य ने रिट पिटिशन के माध्यम से कहा है किसी भी जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगाना या जमीन पर किसका दावा है, इस पर निर्णय करने का अधिकार ज्यूडिशियरी या सक्षम न्यायालय को है। कोर्ट ने मामले में सीओ कांके द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कांके थाना के नोटिस, जिसमें निर्माण कार्य पर रोक लगी थी, उसे भी रद्द कर दिया। इसके अलावा इस तरह के अवैध आदेश पारित करने पर कोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए कांके सीओ पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि सीओ किसी जमीन पर खुद के स्तर से निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगा सकते हैं, इससे संबंधित कोई पॉवर भी उनके पास नहीं है। यदि किसी जमीन का टाइटल सूट लंबित है तो उसमें रोक लगाने का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय के पास है, जहां टाइटल सूट लंबित है। सीओ को यह अधिकार नहीं है कि अदालत में टाइटिल सूट लंबित रहने पर किसी तरह के रोक का आदेश पारित कर सकते हैं। कोर्ट के टाइटल सूट से संबंधित मामले में सीओ बिना किसी न्यायिक आदेश के अपने स्तर पर जमीन निर्माण पर किसी तरह का हस्तक्षेप या रोक नहीं लगा सकते हैं। साथ ही न ही पुलिस या थाना को यह अधिकार है कि वह जमीन के टाइटल सूट के मामले में किसी तरह का आदेश खुद के स्तर से जारी कर सके। प्रार्थी के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने यह भी कोर्ट को बताया कि पुलिस जमीन के किसी मामले में तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब लॉ एंड आॅर्डर का उल्लंघन हो रहा हो और मारपीट की संभावना हो।