अजय शर्मा
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जब राज्य की कमान संभाली थी तो उस समय सबकुछ विपरीत स्थिति में था। खजाना खाली, लॉ एंड आर्डर की समस्या, खनिज संपदाओं की तस्करी, एक समुदाय विशेष के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे थे। इन सबों से हेमंत और उनकी टीम को निपटना था। बेरोजगारी अलग मुंह बाये खड़ी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सबसे पहले झारखंड में बेतहाशा सरकारी खर्च पर रोक लगा दिये। फालतू नये भवन के निर्माण पर रोक लगा दी गयी। सीएम खुद नये विधानसभा भवन के निर्माण पर सवाल खड़ा कर चुके थे। कहा था कि गरीब राज्य में इस तरह के भवन की आवश्यकता नहीं। पलायन अलग समस्या थी। सीएम पहले अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत बात की और क्रमवार कई बड़े फैसले लिये। 29 दिसंबर को महागठबंधन सरकार सालभर पूरा करने वाली है। आदिवासी और अल्पसंख्यकों के अलावा झारखंडवासियों की निगाहें भी सीएम की ओर टीकी हैं। उस दिन क्या-क्या घोषणा हो सकती है। वर्ष 2021 को नौकरी वर्ष घोषित किया जायेगा। राज्य में खाली पड़े पदों को भरने की घोषणा सीएम कर सकते हैं। आदिवासियों के हित में कई बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। सोना सोबरन धोती साड़ी योजना की भी घोषणा की जा सकती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि सरकार बढ़ा सकती है। सीएम जब नेमरा गये थे तो उस समय रामगढ़ के अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात भी की थी। विभागों की समीक्षा भी इसकी एक कड़ी है कि जिससे यह पता चल सके कि सरकारी विभागों में कितने पद खाली हैं। मुख्यमंत्री बोलने में कम, काम करने में ज्यादा भरोसा रखते हैं। कमान संभालते ही उन्होंने एक रुपये में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री करने की योजना बंद करा दी। साथ ही वैसी सभी योजनाओं को बंद कराया गया जो राज्यहित में नहीं थीं। सीएम हेमंत ने स्थानीय नीति की समीक्षा के भी आदेश दिये। साल भर में कई ऐसे काम हुए जो सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में माने जा सकते हैं। इनमें कोरोना काल में बेहतर काम भी शामिल है। करीब छह माह लॉकडाउन की स्थिति में झारखंड की सरकार ने देश स्तर पर अलग लकीर खींच दी थी जिसमें बाहर से मजदूरों को लाना भी शामिल है। सरना आदिवासी धर्म कोड को जनगणना के कॉलम में जोड़ने का बिल पास कराकर भारत सरकार को भेजना भी बड़ा काम है।