रांची। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने शुक्रवार को हेमंत सरकार की नियोजन नीति 2021 के निर्णय के विरोध में हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रकाश ने कहा कि हेमंत सरकार की बनाई गई एक भी नीति लोक कल्याणकारी नहीं है और ऐसी नीतियों का यही हाल होना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा युवाओं को रोजगार देने की कभी नहीं रही। इसलिए यह सरकार कानून विरोधी नीतियों के द्वारा केवल योजनाओं को लटकाने, भटकाने और अटकाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि झारखंड के मूलवासी हेमंत सरकार के नियोजन नीति से परेशान थे। नियोजन नीति में झारखंड से 10वीं और 12वीं पास के शर्त के कारण कई झारखंडी बच्चे नियोजन के लिए अयोग्य करार हो रहे थे जबकि दूसरे राज्यों से निवास करने वाले लेकिन केवल झारखंड में 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी योग्य माने जा रहे थे, जिसे न्यायालय ने रद्द किया। उन्होंने कहा इसी प्रकार भाषा के आधार पर भी राज्य सरकार ने अनुचित निर्णय लिए। घर घर बोली जाने वाली हिंदी और अंग्रेजी को हटाकर इस सरकार ने चंद लोगों द्वारा व्यवहार में लाए जाने वाले उर्दू भाषा को प्राथमिकता दी जो तुष्टिकरण की पराकाष्ठा थी। प्रकाश ने जनहित और राज्य हित हाई कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि हेमंत सरकार को सस्ती लोकप्रियता के लिए जनविरोधी और संविधान विरोधी फैसला लेने से बचना चाहिए।
ना नीति, ना नियत, ना नेतृत्व क्षमता है: अमर कुमार बाउरी

झारखंड हाईकोर्ट ने 2021 नियोजन नीति को रद्द करने पर पूर्व मंत्री सह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमर कुमार बाउरी ने कहा कि हमने शुरू में ही राज्य सरकार को चेताया था कि ठगना व दिग्भ्रमित करना बंद करें और पक्की नीतिगत फैसले ले, लेकिन सत्ता के नशे में चूर व अटकाने, भटकाने, लटकाने की विद्या में पारंगत यह ठगबंधन सरकार ने हमारी एक नहीं सुनी। आज इसका खामियाजा राज्य के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। झारखंड सरकार की यह कभी नियत ही नहीं था कि राज्य के बच्चों को नियोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि इनकी ना नीति, ना नियत, ना नेतृत्व क्षमता है। तथाकथित नियुक्ति वर्ष की कहानी समाप्त हो चुकी है।

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