मुंबई। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने कहा कि सोमवार से शुरू हो रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित शिंदे-फडणवीस सरकार के चाय-पान कार्यक्रम में विपक्ष शामिल नहीं होगा। पवार ने कहा कि शीतकालीन सत्र की अवधि कम से कम तीन सप्ताह का हो, इसका प्रयास किया जाएगा। साथ ही सदन के कामकाज में शोर शराबा की बजाय मुद्दों पर सविस्तार चर्चा पर विपक्ष जोर देगा।
नागपुर में सोमवार से होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की रणनीति तय करने के लिए विपक्षी नेताओं की एक बैठक हुई । इस बैठक के बाद अजीत पवार ने पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार पिछले छह महीनों में हर मोर्चे पर विफल रही है। महाराष्ट्र में महापुरुषों का अपमान संवैधानिक पद पर विराजमान राज्यपाल कोश्यारी से लेकर मंत्री और सत्ताधारी नेता तक कर रहे हैं और माफी भी नहीं मांग रहे हैं। राज्य में महंगाई व बेरोजगारी जैसे संवेदनशील मुद्दों से भटकाने के लिए सत्ताधारी वाचालवीर तरह- तरह का व्यक्तव्य जारी कर रहे हैं, इन पर सरकार का अंकुश नहीं है। साथ ही महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मूकदर्शक बने हुए हैं। किसानों को भारी बारिश की नुकसान भरपाई नहीं मिल सकी है। राज्य सरकार विकास फंड देने में भेदभाव कर रही है। विदर्भ का अनुशेष बढ़ गया है। इन सब मुद्दों पर विपक्ष विस्तृत चर्चा करेगा और इसका सरकार से उत्तर प्राप्त करने का प्रयास करेगा। इस मौके पर विधानपरिषद के नेता अंबादास दानवे, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पाटोले, शेकाप नेता जयंत पाटिल, छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटिल आदि नेता उपस्थित थे।