मुंबई । सरकारें भले ही समृद्धि के तमाम दावे कर रही हो लेकिन, दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक आर्थिक राजधानी मुंबई से डेढ़-दो घंटे की दूरी पर स्थित पालघर जिले में भूख और कुपोषण से आदिवासियों के बच्चों की मौतें विकास की पोल खोलने के लिए काफी है। कुपोषण मिटाने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के तमाम अभियान यहा के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में लाचार नजर आ रहे हैं। पालघर जिले में एक बार फिर शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है है 2021-22 में 294 बच्चों की मौत और 20 मातृ मृत्यु हुई है।
2022-23 में अक्तूबर तक 151 बच्चों की मौत और 7 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए है। इनमें से अधिकांश बच्चों की मौत जव्हार, दहानू और विक्रमगढ़ तालुकों में हुई है। कई बच्चों की मौत तो सिर्फ इसलिए हो गई कि गांव तक सड़के नही थी। और महिलाओं और बच्चों को डोलियों के सहारे नही नदी नाले से उन्हे अस्पताल ले जाना पड़ा। एक और प्रमुख कारण इन इलाको में उपचार की कोई अच्छी व्यवस्था थी न होना है।पालघर के दहानू, मोखाड़ा,जव्हार विक्रमगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, बेरोजगारी और कुपोषण को दूर करने के लिए ठाणे जिले को विभाजित करके पालघर जिला बनाया गया था। लेकिन अब आदिवासियों को इन समस्याओं से मुक्ति नही मिल सकी है। जबकि सरकारें इनके विकास पर करोड़ों खर्च करने का दावा करती रहती है।
इनमें से अधिकतर बच्चों की मौत जिले में अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर इलाज के अभाव में सड़कों की कमी के कारण हुई है।
जिसने उन सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी जिनमें आदिवासी इलाकों तमाम सुविधाएं और बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार से संबंधित दावे बढ़-चढ़कर किए जाते है। पालघर में आज भी शिशु मृत्यु दर जैसी गंभीर समस्या से निजात पाने में प्रशासन और सरकार दोनों नाकाम साबित हो रहे हैं। और मां की गोद में कई घरों के चिराग बुझ गए।
जानिए क्या कहते है आंकड़े
● 2014-15 शिशु मृत्यु दर (626)
● 2015-16 शिशु मृत्यु दर (565)
● 2016-17 शिशु मृत्यु दर (557) मातृ मृत्यु दर (18)
● 2017-18 शिशु मृत्यु दर (469) मातृ मृत्यु दर (19)
● 2018-19 शिशु मृत्यु दर (348) मातृ मृत्यु दर (13)
● 2019-20 शिशु मृत्यु दर (303) मातृ मृत्यु दर (10)
● 2020-21 शिशु मृत्यु दर (296) मातृ मृत्यु दर (12)
● 2021-22 शिशु मृत्यु दर (296) मातृ मृत्यु दर (20)
● 2022-23 (अक्टूबर तक) शिशु मृत्यु दर (151) मातृ मृत्यु दर (07)