- मुख्यमंत्री ने कहा : वर्ष 2023 इंप्लीमेंट वर्ष होगा
- राज्य बनने के बाद जो व्यवस्था ध्वस्त हो गयी थी, उसे ठीक करने का प्रयास किया जा रहा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आज सरकार के प्रति लोगों की उम्मीदें बढ़ी है। लोगों में उत्साह बढ़ा है। सरकार 3.25 करोड़ लोगों को ध्यान में रखकर कार्य योजना तैयार कर रही है। उनके हित में फैसला ले रही है। जो वर्ग वंचित और शोषित है, उस पर सरकार ज्यादा फोकस कर रही है। उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया जा रहा है। साथ ही राज्य अलग होने के बाद जिन व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया गया था, उसे ठीक करने का प्रयास भी महागठबंधन की सरकार कर रही है। अगले वर्ष यानी 2023 इंप्लीमेंट वर्ष होगा। मुख्यमंत्री बुधवार को अपने आवास पर सरकार के तीन साल पूरा होने के मौके पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
आकंड़ो पर नहीं काम पर भरोसा करते:
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अनवरत काम कर रही है। किसान, मजदूर, आदिवासी, अल्पसंख्यक और छात्र-छात्राओं के हित में कई बड़े निर्णय लिये गये हैं। सरकार ने अपना रास्ता बना लिया है। हमने एक लंबी लकीर खींची है। वह लकीर गाढ़ी है। हमें उसी रास्ते चलना है। हेमंत सोरेन ने कहा कि हम आंकड़ों पर भरोसा नहीं करते, काम पर भरोसा करते हैं।
आपदा को अवसर में बदलने का प्रयास किया:
पत्रकारों के सवालों का जबाव देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार 29 दिसंबर को 3 साल पूरा कर रही है। इस दौरान कई उतार-चढ़ाव की देखे गये। सरकार बनने के साथ ही करोना आ गया, उससे लड़े। कोरोना से राज्य में किस तरह से लड़ा गया, यह पूरा देश देखा। इसके बाद सूखा का सामना करना पड़ा। योजनाओं के संबंध में कुछ बोलने की जरूरत नहीं है। जनता सब देख रही है। हमने आपदा को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।
अगले 10 साल में राज्य अग्रणी होगा: मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड पिछड़े राज्यों में शामिल है। बीते 20 साल तक इसके विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब सरकार लागातर विकास का काम कर रही है। हर वर्ग के लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं जिसका प्रतिनिधित्व करता हूं, उसका जुबान नहीं है। या उसकी आवाज को बराबर कुचल दिया गया। भूखा, नंगा, किसान, मजदूर आदिवासी आदि अब इनके बीच ईमानदारी से काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो झारखंड में विकास की गाड़ी स्टार्ट हो गयी है। यह तेजी से दौड़ दौड़ेगी। वह भी टॉप गेयर में। इस राज्य को दूसरे राज्य से बेहतर स्थिति में खड़ा करने की कोशिश होगी। अगले 10 साल में पिछड़े राज्य किस श्रेणी से झारखंड को निकाल-बाहर करेंगे। जारखंड देश के अग्रणी राज्यों में होगा।
नियोजन नीति नीति पर रास्ता निकालने का काम करेंगे:
मुख्यमंत्री मंत्री ने कहा कि नियोजन नीति को रद्द किया गया है। पानी जिस तरह अपना रास्ता निकाल लेती है, उसी तरह नियोजन नीति का भी रास्ता निकाला जायेगा। सरकारी नौकरियों में 75 फीसदी लोग बाहर के आ जाते हैं। इससे यहां के मूलवासियों का हक मारा जाता है। आरक्षण की श्रेणी में आने वाले जाति तो सुरक्षित हैं, लेकिन मूलवासी का कोटा मारा जा रहा है। नियोजिन नीति के जरिए इसे रोकने का प्रयास किया गया था। अब बिना नियोजन नीति के नियुक्तियों में कैसे बाहरी को रोका जाय, इस पर काम किया जा रहा है। बिहार के लोग महाराष्ट्र या झारखंड के लोग बाहर जाते हैं, तो पीटे जाते हैं। कुछ पद ऐसे हैं जो केवल मूलावासी के लिए होनी चाहिए।
विपक्ष मुद्दा और नेता विहीन है:
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष मुद्दा विहीन है। साथ ही नेता विहीन भी हो गया है। यही वजह है कि कई आयोग की नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। विपक्षी क्या करें, खुद समझ नहीं पा रहे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इनके कुशासन और उत्पात का मंजर राज्य के लोगों ने देखा है। अब समय आ गया है कि 20 साल के शासन और हमारे सरकार की 3 साल के शासन की तुलना या आकलन लोग करें। हम बातों में नहीं काम पर भरोसा करते हैं अभी और बहुत कुछ काम करना बाकी है