-आदिवासी एकता महारैली को लेकर मंथन
रांची। आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर 4 फरवरी को रांची में आदिवासी एकता महारैली होगी। इसे लेकर गुरुवार को विभिन्न संगठनों संग पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने विचार मंथन किया। बंधु तिर्की ने आदिवासी एकता महारैली का एकमात्र उद्देश्य आदिवासी समुदाय को एकजुट करना है। आदिवासियों के विकास के साथ ही उन्हें वैसे विभाजनकारी तत्वों से बचाना है, जो केवल सत्ता के लिए लोगों को लड़ाने का काम कर रहे हैं। कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के बीच फूट डाल कर अपने स्वार्थ के लिए उन्हें लड़वाने के साथ पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी सफलता से बहुत अधिक उत्साहित हैं। वे अपने इस प्रयोग को झारखंड में दोहराना चाहते हैं, ताकि आगामी लोकसभा-विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता मिल सके, लेकिन झारखंड के आदिवासी जागरुक और समझदार होने के साथ ही एकजुट भी हैं। संयोजक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि आज आदिवासी समुदाय के बीच असंवैधानिक और गैर जरुरी चीजों को भाजपा आरएसएस के द्वारा थोपा जा रहा है। देश में काबिज केंद्र की भाजपा सरकार आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड पर चुप्पी साधे हुए है। भाजपा पूरी तरह आदिवासियों के अधिकारों को खत्म करने पर आमादा है। प्रो जगदीश लोहरा ने कहा कि आदिवासी समाज को विघटनकारी ताकतों के एजेंडे को ढकेल कर आदिवासी समुदाय की बुनियादी यथार्थवादी तार्किक बातों को सामने लाना है। पूर्व मेयर रमा खलखो ने कहा कि आदिवासी समाज को बांटकर हाशिये में धकेलने की कोशिश जारी है। केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि आदिवासी समुदाय पर आज चौतरफा हमला जारी है। आदिवासी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष जगरनाथ उरांव ने कहा कि आदिवासी जमीन की लूट-खसौट आज बड़ा मुद्दा है। पूर्व टीएसी सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि आदिवासी मुद्दों को लेकर व्यापाक स्तर पर जन जागरण अभियान चलाना होगा। बैठक में राजेश लिंडा, संजय कच्छप, बेलस तिर्की, दिनेश उरांव, सुरेंद्र तिर्की, रोशन मुंडा, नीरा टोप्पो, मंटू मुंडा, सुका उरांव, शिबू तिर्की, उषा खलखो समेत अन्य उपस्थित थे।
Palamu Division
Kolhan Division
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.


