– रिश्वत मांगने, धमकी देने समेत लग चुके हैं कई गंभीर आरोप
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। आइएएस छवि रंजन आखिरकार प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के हत्थे चढ़ गये। उनकी गिरफ्तारी चौंकाने वाली नहीं थी। अपने 14 साल के करियर में छवि रंजन ने जिस तरह की अपनी ‘छवि’ बना ली थी, उसमें कभी न कभी इस तरह के हालात का आना तय माना जा रहा था। सेना की भूमि समेत अन्य भूखंडों के फर्जीवाड़ा में फंसे छवि रंजन के खिलाफ पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। वह हमेशा से विवाद में रहे हैं।
छवि रंजन झारखंड कैडर के 2011 बैच के आइएएस अधिकारी हैं। अपने कारनामों के कारण शुरू से ही विवादों में रहे हैं। झारखंड विधानसभा के पिछले साल बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान विधायक सीपी सिंह ने आइएएस छवि रंजन के खिलाफ मामला उठाया था। उन्होंने छवि रंजन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उस वक्त छवि रंजन रांची के उपायुक्त थे। सीपी सिंह ने आरोप लगाया था कि वे हथियार का लाइसेंस देने के लिए पैसे लेते हैं। इसपर विधानसभा में खूब हंगामा हुआ। सीपी सिंह के आरोपों पर राज्य सरकार के पूर्व मंत्री और खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने अधिकारी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग उठायी थी। इसके अलावा 2021 में एक संवेदक ने हथियार का लाइसेंस देने के बदले पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन आयुक्त और रांची के तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक को शिकायत की थी। हालांकि बाद में वह इससे मुकर गया। इसके अलावा रांची में तैनाती के दौरान हाइकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने इनपर धमकी देने का आरोप लगाया था। उन्होंने हाइकोर्ट में इसकी लिखित शिकायत भी की थी। हाइकोर्ट ने इसे लेकर उन्हें कड़ी फटकार लगायी थी। छवि रंजन पर लग रहे आरोपों के कारण सरकार ने 10 जुलाई 2022 में उनका तबादला समाज कल्याण विभाग के निदेशक पद पर कर दिया गया।
छवि रंजन के थोड़ा और पुराने मामले को देखा जाए तो 2015 में कोडरमा में उपायुक्त के पद पर तैनाती के दौरान मरकच्चो जिला परिषद डाकबंगला परिसर में लगे पेड़ों को काटने का आदेश देने का आरोप छवि रंजन पर लगा था। यह मामला विधानसभा में उठा तो खूब हंगामा हुआ। आरोपों के कारण राज्य सरकार ने उनका स्थानांतरण कर दिया गया था। इस मामले में एसीबी ने जांच की थी। एसीबी की पूछताछ में छवि रंजन के अंगरक्षक रहे कृष्ण वर्मा ने पूछताछ में इसे स्वीकार किया था। उसके मुताबिक छवि रंजन के आदेश पर तत्कालीन अंचलाधिकारी, दो चौकीदारों और दो स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पेड़ काटे गए। जब मामले का खुलासा हुआ तो पेड़ दूसरे स्थान पर फेंक दिये गये। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
छवि रंजन की 15 जुलाई 2020 में रांची के उपायुक्त पद पर तैनाती हुई। उपायुक्त बनने के बाद आरोपों का सिलसिला चालू हो गया। रांची में उपायुक्त के पद पर तैनाती के दौरान जमीन के दलालों और माफिया से मिलीभगत के आरोप छवि रंजन के खिलाफ लगे। सेना की जमीन की फर्जी खरीद-बिक्री मामले में तत्कालीन आयुक्त की जांच रिपोर्ट में भी इनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की गयी थी। चर्चा यहां तक थी कि छवि रंजन को महंगी शराब से लेकर कीमती मोबाइल तक उपहार के तौर पर मिले हैं। उन्होंने केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार मंत्रालय को दाखिल सूची में कुछ उपहार के सामानों को जिक्र भी किया है। इडी जमीन फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पिछली पूछताछ में आमने सामने भी कराया था। उन सभी ने छवि रंजन पर कई तरह के आरोप मढ़े थे। छवि रंजन पर इस मामले में लगे आरोप, उनसे 24 अप्रैल को हुई पूछताछ और प्राप्त दस्तावेज के आधार पर गिरफ्तारी पहले से ही निश्चित मानी जा रही थी। जिसे अंतत: गुरूवार को 10 गंटे की पूछताछ के बाद इडी ने अंजाम दिया।