बेतिया। सत्याग्रह फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन सह अंतरराष्ट्रीय पीस एंबेसडर डॉ0 एजाज अहमद (अधिवक्ता ) डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड,डॉ शाहनवाज अली, डॉ अमित कुमार लोहिया, वरिष्ठ पत्रकार सह संस्थापक मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट डॉ अमानुल हक, डॉ महबूब उर रहमान एवं पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन ने संयुक्त रुप से कहां कि आज ही के दिन आज से 115 वर्ष पूर्व 23 सितंबर 1908 को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर दिनकर का जन्म हुआ था ।उनका सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा।
हिंदी के एक प्रमुख लेखक कवि एवं निबंधकार थे रामधारी सिंह दिनकर। अपनी रचनाओं के माध्यम से देश के स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं एवं स्वतंत्रता सेनानियों को जागृत करने का सफल प्रयास किया। अंग्रेजी शासन को उनसे हमेशा ही शिकायत रही कि दिनकर की रचनाओं से राष्ट्रीय आंदोलन में जान आ रही है। 1938 पुकार की रचनाओं के बाद उनका तबादला पश्चिमा चंपारण के नरकटियागंज कर दिया गया। जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों एवं मूल्यों के अनुरूप अपनी रचनाओं से राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की नई दिशा प्रदान की।
इस अवसर पर डॉ एजाज अहमद, डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड,बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के शोधार्थी डॉ0 शाहनवाज अली, पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन एवं वरिष्ठ पत्रकार सह संस्थापक मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट डॉ अमानुल हक ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जीवन दर्शन से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, ताकि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बन सके। भारत चीन 1962 के युद्ध के समय रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं ने भारतीय सत्ता एवं जनमानस को झकझोर दिया था।
इस अवसर पर राष्ट्रकवि दिनकर के सम्मान में वृक्षारोपण सत्याग्रह रिसर्च फाऊंडेशन मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा किया गया।इस अवसर पर वक्ताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि कवियों एवं शायरों के सम्मान में बेतिया पश्चिम चंपारण में सरकार द्वारा साहित्यकार राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी देश के स्वतंत्रता आंदोलन मे कवियों एवं शायरों के योगदान को जान सके। यही होगी सरकार द्वारा इन कवियों एवं शहरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि।