झारखंड राज्य भर से आए विभिन्न जिलों के आंदोलनकारी संगठनों/ सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक संगम गार्डेन मोरहाबादी रांची में संपन्न हुई। इस बैठक में रांची, खूंटी, गुमला,लोहरदगा, सिमडेगा, लातेहार, कोडरमा, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने महत्वपूर्ण विचारों को रखा। इस बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिया गया।
1. भाजपा आरएसएस की नीतियां जनविरोधी, आदिवासी विरोधी ही नही अघोषित तौर पर फासिस्ट ताकतें हैं।
2.भाजपा गठबंधन जिनकी केंद्र में सत्तारूढ़ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार कारपोरेट औधौगिक पूंजीपतियों और मनूवादियों- ब्राह्म्णवादियों की सरकार है। इस सरकार का चरित्र पूरी तरह दलित, पिछड़ा, आदिवासी अल्पसंख्यक विरोधी ही नही, ग़रीब मध्यम वर्ग विरोधी है।
3.खासकर भाजपा आरएसएस आदिवासियों के सभी संवैधानिक अधिकारों, उनके इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों,उनकी जंगल, जमीन लूटने वालों के पक्ष में खड़ी है और आदिवासियों को खात्मा करने पर तुली है।
4. इसी संदर्भ में विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों/ सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई । इसमें निर्णय लिया गया कि सभी आदिवासी -मूलवासी आंदोलनकारी संगठनों का राज्य स्तरीय समन्वय बनाकर संघर्ष तेज किया जाएगा।
5. इस बैठक में निर्णय हुआ कि विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों/ सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिलाकर एक संगठन जिसका नाम ” झारखंड जनसंघर्ष समन्वय मंच” रखा गया। इस संगठन में राज्य भर के सभी आदिवासी-मूलवासी संगठनों/ जन संगठनों को जोड़ा जाएगा। यह मूलतः आदिवासी मूलवासी झारखंडी जन मुद्दों और भाजपा – आरएसएस की फासिस्ट/ कारपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ लड़ने वाली फ्रंट होगा।इसकी विस्तारित बैठक आगामी 1 मार्च 2024 को पुनः संगम गार्डेन मोरहाबादी रांची में आयोजित की जाएगी। इसमें राज्य स्तरीय आदिवासी – मूलवासी / झारखंडी विषयक एजेंडा और रणनीति तय किया जाएगा। उसी दिन कमिटी का विस्तारित किया जाएगा। अभी तत्काल में इसके लिए प्रेस- मिडिया को जानकारी देने के लिए दो प्रवक्ता 1. लक्ष्मीनारायण मुंडा 2. प्रभाकर तिर्की बनाये गये हैं। वहीं इसके लिए तात्कालिक तौर पर दो कोषाध्यक्ष 1. शिवा कच्छप 2. रमा खलखो को बनाया गया है।
इस बैठक में मुख्य रुप से पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, लक्ष्मीनारायण मुंडा,प्रभाकर तिर्की,अजय तिर्की,दुर्गावती ओड़ेया, रमा खलखो, रतन तिर्की, जगदीश लोहरा,बेलस तिर्की, शिवा कच्छप, कृष्णा घटवार,हरिकुमार भगत, अभय भूटकुंवर, सुशील ओड़ेया,बासवी किड़ो,हरिनारायण
महली,अमित
एक्का,विशाल तिर्की, एतवा उरांव,शिव उरांव, बिरसा मुंडा, राजेश लिंडा, संगीता उरांव, संजय टोप्पो,अजित तिर्की, संजय कच्छप,नीलम तिर्की आदि लोग शामिल थे। इस बैठक का संचालन लक्ष्मीनारायण मुंडा ने किया।