रांची में कुड़मी हुंकार महारैली
रांची। कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने को लेकर रविवार को मोरहाबादी मैदान में हुंकार महारैली का आयोजन किया गया। महारैली की शुरुआत भूमि पूजा और झंडा गड़ी करके किया गया। महारैली में झारखंड के विभिन्न जिलों से कुड़मी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा, पारंपरिक नाच-गान, छऊ नृत्य, झूमर, नटुआ-घोड़ा नाच और गाजे-बाजे के साथ मोरहाबादी पहुंचे।
इस दौरान टोटेमिक कुड़मी समाज के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने कहा कि यह महारैली टेलर मात्र है। कुड़मी समाज को आदिवासी समाज जैसा ही हक-अधिकार देना होगा। अपने हक के लिए कुड़मी समाज काफी दिनों से लड़ाई लड़ रहा है। केंद्र सरकार अविलंब टोटेमिक कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करे, अन्यथा आगामी चुनाव में परिणाम देखने को मिल जायेंगे। इस मांग को लेकर झारखंड का पूरा कुड़मी समाज गोलबंद है।
ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज न सिर्फ गोलबंद है, बल्कि इस महारैली में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किये। राज्य में 30 विधानसभा और सात लोकसभा में कुड़मी बहुल क्षेत्र है। महतो समाज के वोट पर ही यहां की जीत निर्भर है। इसके बावजूद कुड़मियों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब कुड़मी समाज जग चुका है। अब कुड़मी को राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक हिस्सेदारी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कुड़मी समाज संवैधानिक अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। इसके लिए कुड़मी समाज के लोगों को एकजुट होना होगा।
महारैली में रामपोदो महतो, लालटु महतो, ओम प्रकाश महतो, राजेंद्र महतो, सखीचंद महतो, दनी सिंह महतो, कपिलदेव महतो, गिरिधारी महतो, हेमलाल महतो, रचिया महतो, थानेश्वर महतो सहित अन्य मौजूद थे।
शीतल ओहदार ने कहा, कुड़मी को आदिवासी जैसा ही हक-अधिकार मिले
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