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    Home»राजनीति»क्यों गुजरात चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी भाजपा के लिए ‘पावर प्ले’ साबित हुई है
    राजनीति

    क्यों गुजरात चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी भाजपा के लिए ‘पावर प्ले’ साबित हुई है

    आजाद सिपाहीBy आजाद सिपाहीOctober 27, 2017No Comments5 Mins Read
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    बीते दो हफ्तों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात सरकार ने विभिन्न योजनाओं की ताबड़तोड़ घोषणाएं की हैं

    चुनाव आयोग ने अपने ऊपर उठ रहे सवालों के बीच गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है. राज्य की कुल 182 विधानसभा सीटों के लिए नौ और 14 दिसंबर को मतदान होना है. इसके साथ ही राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है. इसका मतलब है कि राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार भी अब चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक गुजरात के लिए किसी तरह की घोषणाएं नहीं कर पाएगी.

    बीती 12 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने केवल हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए तारीखों का ऐलान किया था. उस वक्त तक सभी यही मानकर चल रहे थे कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनावों की तारीखों का ऐलान एक साथ ही किया जाएगा. लेकिन आयोग ने ऐसा नहीं किया. उसका कहना था कि गुजरात में बाढ़ राहत कार्यों को देखते हुए चुनाव की तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी. उसका यह भी कहना था कि हिमाचल प्रदेश के चुनाव का असर गुजरात के चुनाव पर न पड़े इसलिए दोनों राज्यों के नतीजे एक साथ – 18 दिसंबर को – ही घोषित किए जाएंगे.

    चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर उसकी काफी आलोचना हुई. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी सहित तमाम विपक्षी पार्टियों ने इस वजह से आयोग पर जमकर निशाना साधा. एसवाई कुरैशी ने इस बारे में आयोग से उचित जवाब की मांग भी की. दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना था कि आयोग ने गुजरात चुनाव में भाजपा की मदद करने के लिए ऐसा किया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना था, ‘यदि प्रधानमंत्री आचार संहिता लागू होने के बाद जाते तो फिर वे एक कैंपेनर की हैसियत से जाते और लोकलुभावन और जुमलेबाजी भरे वायदे वहां नहीं कर पाते.’

    बीते दो हफ्तों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार गुजरात का दौरा किया. इस दौरान गुजरात के लिए उन्होंने एक के बाद एक कई घोषणाएं की. इसके अलावा कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया गया. केंद्र के साथ-साथ गुजरात सरकार ने भी हजारों करोड़ की योजनाओं की घोषणा कर मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है. इन सारी बातों के आधार पर कहा जा सकता है कि बीते दो हफ्ते भाजपा के लिए ‘पावर प्ले’ साबित हुए हैं. इस दौरान राज्य के साथ-साथ मोदी सरकार भी चुनावी पिच पर जमकर बल्लेबाजी करती हुए दिखी है.

    बीते मंगलवार को केंद्र सरकार ने भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी है. इसके तहत अगले पांच साल में करीब सात लाख करोड़ रु की लागत से 83,000 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी. बताया जाता है कि ये सड़कें देश के सीमावर्ती इलाकों, बंदरगाहों और तटवर्ती क्षेत्रों को आपस में जोड़ेंगी. इस परियोजना के तहत 44 इकनॉमिक कॉरीडोर भी विकसित किए जाएंगे. इस योजना का लाभ पूरे देश को हासिल होने के बावजूद इसे गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है लंबी समुद्री सीमा की वजह से गुजरात को इससे विशेष फायदा पहुंच सकता है.

    इससे पहले 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावनगर स्थित घोघा और दाहेज के बीच रो-रो फेरी सेवा की शुरुआत की थी. इस सेवा के शुरू होने के बाद दोनों प्रमुख शहरों के बीच की दूरी करीब 50 मिनट में ही तय की जा सकती है. पहले इसमें करीब आठ घंटे लग जाते थे. बताया जाता है कि इससे सौराष्ट्र और सूरत के व्यापारी काफी लाभान्वित होंगे. नोटबंदी और जीएसटी को लेकर गुजरात के व्यापारियों में काफी नाराजगी रही है. इस लिहाज से इस सेवा की अभी हुई शुरुआत का भी एक चुनावी मतलब निकाला जा सकता है.

    इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 3600 करोड़ रु की वड़ोदरा स्मार्ट सिटी की भी नींव रखी और अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई. साथ ही, उन्होंने कई छोटी-बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया.

    केंद्र सरकार के अलावा विजय रुपाणी सरकार ने भी मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. पिछले कुछ दिनों में गुजरात सरकार ने भी करीब 11,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ऐलान किया है. बीते मंगलवार को राज्य की करीब 43,000 आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि (इन्सेंटिव) में 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई. इसके अलावा सफाईकर्मियों की नौकरी को स्थायी करने का भी फैसला किया गया. साथ ही, भावनगर में चार दशक पुराने 15,000 घरों का नियमितीकरण करने की भी घोषणा की गई.

    मंगलवार को ही रूपाणी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में एक फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान भी किया है. इसी दिन सरकारी कर्मचारियों को साल में 11 दिनों का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश और गर्भवती महिलाओं को 90 दिनों की अतिरिक्त छुट्टी की सौगात भी दी गई है. इनके अलावा सरकारी कार्यालयों में ठेके पर काम करने वाले कर्मियों की मौत पर उनके परिवारों को दो लाख रुपयों की सरकारी मदद देने की घोषणा भी की गई है.

    इसके अलावा सहायक विद्युतकर्मियों, शिक्षकों और शहरी स्थानीय निकाय के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा भी मंगलवार को ही की गई. इससे पहले निचले स्तर के कर्मचारियों को दीवाली के मौके पर बोनस का तोहफा दिया गया. इनके अलावा मां वात्सल्य स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ हासिल करने के लिए आय की सीमा को बढ़ाकर 2.5 लाख रु कर दिया गया है.

    राज्य सरकार ने किसानों को खुश करने के लिए भी कई ऐलान किए. इनमें उनके तीन लाख रुपये तक के कर्ज को ब्याजमुक्त करना भी शामिल है. इसके अलावा ड्रिप सिंचाई के लिए काम आने वाले उपकरणों पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी को खत्म कर दिया गया है. रूपाणी सरकार ने पाटीदारों की नाराजगी को खत्म करने के लिए 326 पाटीदारों के खिलाफ चल रहे मामलों को भी वापस ले लिया है. इन पर ये मामले पाटीदार आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे.

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