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    Home»राजनीति»गुजरात में कई नेता अपने सुरक्षाकर्मियों से ही क्यों डरे हुए हैं?
    राजनीति

    गुजरात में कई नेता अपने सुरक्षाकर्मियों से ही क्यों डरे हुए हैं?

    आजाद सिपाहीBy आजाद सिपाहीNovember 10, 2017No Comments4 Mins Read
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    कुछ महीने पहले तक गुजरात में पुलिस सुरक्षा होना शान की बात माना जाता था. लेकिन अब यहां के कई नेता सरकारी सुरक्षा से जितना हो सके दूर ही रहना चाहते हैं

    गुजरात सरकार हार्दिक पटेल को सुरक्षा देना चाहती है, लेकिन वे सुरक्षा से ही बार-बार बचना चाहते हैं. सुनी-सुनाई है कि हार्दिक पटेल जहां जाते हैं पुलिस से ज्यादा अपनी खुद की उस सुरक्षा टीम पर भरोसा करते हैं जिसे भाजपा के नेता ‘हार्दिक के बाउंसर’ कहकर बुलाते हैं.

    गुजरात में हार्दिक इकलौते ऐसे नेता नहीं हैं जो अपने सुरक्षाकर्मियों से बच-बचकर चलते हैं. गुजरात के प्रदेश स्तर के एक कांग्रेस नेता बताते हैं कि कुछ महीने पहले तक सरकारी पुलिस का सुरक्षा घेरा वहां शान की बात माना जाता था. लेकिन अब नेता सरकारी बॉडीगार्डों से दूर रहना चाहते हैं.

    पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के नेताओं को धीरे-धीरे अंदाज़ा लगा कि वे जिस भी नेता से गुप्त स्थान पर मिलते हैं उसकी खबर भाजपा को हो जाती है. किस नेता से मिले, कितनी देर मुलाकात हुई, कहां मुलाकात हुई, हर खबर लीक हो जाती है. सुनी-सुनाई है कि इस मामले में नेताओं ने पहले आपस में छानबीन की और आखिर में इस नतीजे पर पहुंचे कि भेदी उनके घर में नहीं, सुरक्षा घेरे में है. इसलिए अब कांग्रेस के नेता जब भी खुफिया काम पर निकलते हैं, सबसे पहले अपने सुरक्षाकर्मियों को ही चकमा देते हैं.

    सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि कांग्रेस के प्रदेश नेताओं को यह तरकीब दिल्ली से ही बताई गई है. खुद राहुल गांधी के बारे में कहा जाता है कि वे भी अक्सर अपने एसपीजी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते रहते हैं. खुफिया एजेंसी से जुड़े एक अफसर की मानें तो राहुल गांधी विदेश में कहां जाते हैं, किससे मिलते हैं, यह बात अक्सर किसी और को पता नहीं चल पाती. राहुल जब भी अकेले विदेश दौरे पर निकलते हैं एसपीजी की टीम उनके साथ दिल्ली से आगे नहीं जा पाती.

    एसपीजी की कार्यप्रणाली को समझने वाले एक रिटायर्ड पुलिस अफसर की बात गौर करने वाली है. वे बताते हैं कि एसपीजी की टीम विदेश में भी राहुल गांधी के साथ जा सकती है, लेकिन कई बार राहुल आखिर तक अपनी यात्रा का प्लान उसे नहीं बताते हैं. जब उन्हें हवाईअड्डे के लिए निकलना होता है, उसके कुछ घंटे पहले ही उनका दफ्तर एसपीजी को उनके विदेश दौरे की खबर करता है. इतने कम वक्त में सुरक्षाकर्मियों के लिए राहुल गांधी के साथ विदेश जाना संभव नहीं हो पाता. इसलिए राहुल गांधी की ऐसी यात्राओं के बारे में सिर्फ इतना पता चल पाता है कि वे इस बार किस विमान से, कहां गये हैं. एक बार संसद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह तक ने कह दिया था कि राहुल ऐसा क्या छिपाना चाहते हैं कि वे अपने विदेश जाने की खबर एसपीजी तक को नहीं बताते.

    जैसा राहुल गांधी विदेश जाते वक्त करते हैं, कुछ वैसा ही गुजरात में सुरक्षा पाए कांग्रेस के नेता भी करने लगे हैं – कार बदल-बदल कर आपस में मिलना, अचानक मोटरसाइकिल से निकल जाना आदि. हार्दिक पटेल ने जब लिखा कि सरकार उनकी जासूसी करवा रही है तो उस कथित जासूसी का मतलब भी यही था कि सरकार ने बिना मांगे ही उनकी हिफाजत के लिए पुलिसवाले भेज दिये. जब उन्होंने सरकारी की तरफ से आए पुलिसवालों को लौटा दिया और पुलिस इसके बाद भी उन्हें सुरक्षा देने के लिए अड़ी हुई थी तब उन्हें जासूसी वाली बात कहनी पड़ी.

    प्रदेश की खुफिया एजेंसी हो या केंद्र की, इन संस्थाओं में काम करने वाले अफसरों से बात करें तो आसानी से पता चलता है कि नेताओं पर नज़र रखने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल उनके सुरक्षाकर्मियों का ही होता है. यह परंपरा सालों से चली आ रही है. सभी नेता यह बात पहले से जानते हैं लेकिन सुरक्षा भी जरूरी है इसलिए नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन गुजरात चुनाव एक ऐसा मौका है जब नेताओं के लिए एक-एक सीक्रेट बड़े काम का है. ऐसे में दोनों दल अपने अगले कदम को कैसे भी करके गुप्त ही रखना चाहते हैं.

    इसलिए गुजरात में नेता सबसे ज्यादा सावधान अपने सुरक्षाकर्मियों से ही हैं.

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