धनबाद: झारखंड की राजनीति में धनबाद के भाजपा सांसद ढुल्लू महतो और डुमरी के विधायक जयराम महतो के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बार विवाद का केंद्र झारखंड के प्रखर नेता विनोद बिहारी महतो की विचारधारा और संसदीय कार्यप्रणाली है। जयराम महतो ने सांसद ढुल्लू महतो पर निशाना साधते हुए कहा कि विनोद बिहारी महतो का नाम लेने से पहले उनकी विचारधारा को समझना जरूरी है।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU), धनबाद के तीसरे दीक्षांत समारोह में पहुंचे जयराम महतो ने सांसद पर कटाक्ष किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने करीब 15 वर्षों के राजनीतिक कार्यकाल में सांसद ने कितने विधेयकों पर बहस की है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के लिए संसदीय प्रक्रिया की जानकारी और लगातार सीखते रहने को जरूरी बताया।
विनोद बिहारी महतो की विचारधारा पर आमने-सामने
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड की राजनीति में विनोद बिहारी महतो की विचारधारा को आगे बढ़ाना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी नेता का नाम लेने भर से उसकी विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसके सिद्धांतों और जनहित से जुड़े मुद्दों को समझना आवश्यक है।
उन्होंने बोकारो में एयरपोर्ट निर्माण के मुद्दे का भी उल्लेख किया और इस विषय पर सांसद के रुख को लेकर सवाल उठाए। जयराम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक पहचान और पार्टी से आगे बढ़कर जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
संसदीय कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
जयराम महतो ने सांसद का नाम लिए बिना उन पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि किसी सलाहकार ने उन्हें राज्यस्तरीय नेता के रूप में स्थापित होने की सलाह दी है। उन्होंने सांसद को संसदीय कार्यप्रणाली समझने की नसीहत भी दी।
विधायक ने स्पष्ट किया कि वह उग्रवाद या नक्सलवाद का समर्थन नहीं करते, बल्कि मुद्दों पर चर्चा और उनके समाधान की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं के साथ विधायी प्रक्रियाओं की भी जानकारी होनी चाहिए।
पहले भी एक-दूसरे पर साध चुके हैं निशाना
ढुल्लू महतो और जयराम महतो के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इससे पहले ढुल्लू महतो ने जयराम महतो पर राजनीतिक रुख बदलने और 1932 खतियान तथा भाषा जैसे मुद्दों पर स्पष्टता नहीं रखने के आरोप लगाए थे। सांसद ने उनके राजनीतिक रवैये पर भी सवाल उठाए थे।
अब जयराम महतो के ताजा बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच विवाद फिर चर्चा में है। यह टकराव केवल व्यक्तिगत राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि झारखंड की राजनीति में विचारधारा, जनहित और नेतृत्व की भूमिका को लेकर चल रही बहस को भी सामने लाता है।

