ब्रज मोहन राम झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल रहे हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1958 को चंदवा में हुआ था, जो वर्तमान में लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले वह कृषि कार्य से जुड़े थे।
ब्रज मोहन राम ने वर्ष 1991 में बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह भाजपा के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और 1995 तक इस पद पर रहे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की राजनीति में कदम रखा।
वर्ष 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पलामू संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार तीन बार लोकसभा सांसद बने। उस समय पलामू बिहार का हिस्सा था। नवंबर 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ।
ओडिशा में हरि बाबू कंभमपति की लेंगे जगह
ब्रज मोहन राम ओडिशा के वर्तमान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे। कंभमपति ने 3 जनवरी 2025 को राज्यपाल पद की शपथ ली थी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ब्रज मोहन राम की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।
राज्यपाल राज्य में संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाते हैं। उनका पद संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार और विधायी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों से संबंधित है।
छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति
ब्रज मोहन राम की नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से किए गए छह राज्यों के राज्यपाल संबंधी फेरबदल का हिस्सा है। इस बदलाव के तहत अन्य नियुक्तियां भी की गई हैं।
राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल होंगे। डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक, डॉ. धाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
सभी नियुक्तियां संबंधित पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी।
ब्रज मोहन राम की नियुक्ति से झारखंड के पलामू क्षेत्र से जुड़े एक पूर्व सांसद को ओडिशा में संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली है। उनके राजनीतिक सफर में बिहार विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का अनुभव शामिल रहा है।

