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    Home»विशेष»सत्ता में रहें या न रहें, जनता के बीच जरूर रहते हैं: संजय यादव
    विशेष

    सत्ता में रहें या न रहें, जनता के बीच जरूर रहते हैं: संजय यादव

    shivam kumarBy shivam kumarDecember 13, 2024No Comments11 Mins Read
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    हमारी सफलता की पूंजी है जनता से व्यक्तिगत जुड़ाव
    -लालू यादव लालू यादव हैं, हमारे गुरुदेव, हमारे गाइड
    -राजद अब सर्वजन की पार्टी बन गयी है यानी ए टू जेड की पार्टी
    -हेमंत सोरेन चाहते हैं कि झारखंड में उद्योग का विस्तार हो ताकि पलायन रूके

    आज हम बात कर रहे हैं संजय प्रसाद यादव की। इन्हें राजद कोटे से हेमंत सोरेन सरकार में उद्योग, श्रम नियोजन और कौशल विकास मंत्री बनाया गया है। ये शुरू से ही तेज-तर्रार नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। अब तक ये गोड्डा से राजद के टिकट पर तीन बार वर्ष 2000, 2009, और 2024 में विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। श्री यादव स्पष्टवादी नेता हैं। वह किसी भी मुद्दे पर बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। इन्हें घुमा-फिरा कर बात करना पसंद नहीं। राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले संजय यादव, लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी भी माने जाते हैं। लालू प्रसाद यादव को गुरु मान, इन्होंने राजनीति में कदम रखा। श्री यादव के लिए जनता ही मालिक है। उनका मानना है, वह जो कुछ भी आज हैं, लालू प्रसाद यादव का आशीर्वाद और जनता के स्नेह के कारण ही हैं। संजय बड़े व्यवसायी भी हैं। उनका व्यवसाय में अच्छा-खासा अनुभव है। वह कहते हैं व्यवसायी होने के नाते वह उद्योग के क्षेत्र को अच्छी तरह समझते हैं। एक व्यवसायी और उद्योगपति को कैसी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, उसका उन्हें अनुभव है। हेमंत सोरेन सरकार यह चाहती है कि यहां उद्योग का विस्तार हो, ताकि पलायन रूक सके। वह इस क्षेत्र में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बेहतर काम करने का विजन रखते हैं। आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह ने मंत्री संजय प्रसाद यादव से खास बातचीत की। प्रस्तुत है, उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

    सवाल: सबसे पहले मंत्री पद के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई। हेमंत सोरेन सरकार में आपको उद्योग, श्रम नियोजन और कौशल विकास विभाग का मंत्री बनाया गया है। झारखंड में उद्योगों के विकास और श्रमिकों के कल्याण को लेकर आपका विजन क्या है? आज झारखंड में उद्योग की जो मौजूदा स्थिति है, वह किसी से छिपी नहीं है, आप इसे कैसे देखते हैं और इसे कैसे डेवलप करेंगे?

    जवाब: सबसे पहले आजाद सिपाही की पूरी टीम को मैं, अपनी पार्टी की ओर से और गठबंधन की ओर से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। आप लोग बहुत अच्छी तरह, पूरे राज्य की स्थिति को अखबार और चैनल के माध्यम से दिखा रहे हैं, इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने प्रश्न किया कि झारखंड में क्या स्कोप है। चूंकि मैं अभी-अभी मंत्री बना हूं। सदन भी चल रहा था। पदभार संभाले अभी कुछ ही दिन हुआ है। फिलहाल अफसर लोगों के साथ, पूरी टीम के साथ, परिचय प्राप्त हुआ है। सेक्रेटरी से भी हमने पर्सनली बात की है। देखिये झारखंड राज्य में जो गरीबी है और यहां जो पलायन की स्थिति है, उसको हम कैसे रोक पायें और कैसे काम करें, यह हमारे लिए प्राथमिकता में है। चूंकि बड़ी उम्मीद से हमारे मालिकों यानी जनता ने, गठबंधन को ऐसा जनमत दिया है, अपार बहुमत दिया है और हम लोगों ने जो वादा किया है, उस पर हम कैसे खरा उतर सकते हैं इसे लेकर हम रोड मैप बना रहे हैं। हमारे पास जो विभाग है, उसको कैसे झारखंड और यहां के निवासियों के हित में डवल कर सकते हैं, इस पर हम गहन मंथन कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि विकास का ऐसा रोल मॉडल बनाया जाये कि पूरे देश और विश्व में मैसेज जाये कि झारखंड राज्य आज कितना डेवलप कर रहा है। उन्होंने कहा, हेमंत सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि यहां के लोगों का रोजी-रोजगार के लिए पलायन कैसे रूके। सरकार चाहती है कि हम खुद ही अपने यहां इतना अवसर पैदा करें कि लोगों को दो जून की रोटी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ा।
    सवाल: पलायन झारखंड की बड़ी समस्याओं में से एक है। लोग मजबूर हो जाते हैं, दूसरे राज्यों में काम करने के लिए। इसको लेकर आप क्या सोचते हैं ?

    जवाब: पलायन को लेकर हमारे मुख्यमंत्री काफी चिंतित हैं। ऐसे भी मुख्यमंत्री जी का सोच भी है कि झारखंड के लोगों को कैसे हम ताकत दें, रोजगार दें, क्योंकि बड़ी उम्मीद और विश्वास के साथ, हमारे मालिकों यानी जनता ने हमें चुना है। हम उसी जनता के बल पर आज विधायक बने हैं, मंत्री बने हैं। इन विषयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे बढ़ कर काम भी कर रहे हैं। मैंने भी खुद इस विषय पर काफी चिंतन किया है। आपने देखा भी कि जिस तरह से बजट राज्यपाल महोदय ने बजट पेश किया,उससे स्पष्ट है कि इस राकर में डायरेक्ट जनता के हित के लिए काम किया जा रहा है।

    सवाल: 2019 में आरजेडी एक सीट पर थी, कौन सी जादू की छड़ी आप लोगों ने घुमायी कि आरजेडी चार सीट झटक ले गयी?
    जवाब: देखिए चूंकि, 24 साल के दरम्यान, करीब-करीब 17-18 साल बीजेपी का शासन रहा। बीजेपी के टारगेट पर आरजेडी ही हमेशा रहा। जिस तरह से पीएम मोदी ने देवघर क्षेत्र में प्रोग्राम किया आप लोगों को मालूम ही है। एक तरफ हमारे मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष के नेता भाई तेजस्वी यादव जी की सभा हुई और उसी जगह जस्ट सामने मोदी जी की सभा हुई। जिस तरह से मेरे नॉमिनेशन में लोग उपस्थित हुए थे और सीएम हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव का भाषण सुनने के लिए लोग आये थे, उसी दिन यह तय हो गया था कि यहां कोई भी आ जाये, कोई अंतर पड़ने वाला नहीं है। इस बार झारखंड के लोगों ने मन बना लिया था कि इंडिया गठबंधन को ही मदद करनी है। और इंडिया गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी है। आपने कहा कि आरजेडी कैसे एक से चार हो गयी। देखिये, हम लोग जब बिहार से झारखंड आये थे, तो 13 सीट जेएमएम के पास थी, 11 सीट कांग्रेस के पास थी और नौ सीट हमारे यानी राजद के पास थी। मैं खुद बिहार से 2000 में जीत कर आया था, मैं 2009 में भी जीता था। देखिये आप लोगों को भी पता है कि गोड्डा हम लोगों की पारंपरिक सीट नहीं है। क्योंकि हमारी आबादी भी वहां कम है, कम नहीं काफी कम है और सब दिग्गज वहीं लड़ते हैं। लेकिन उसके बावजूद हमारे मालिकों (जनता) ने तीन-तीन बार मुझ पर विश्वास किया। देखिये मेरे काम करने ककी एक अलग ही स्टाइल है। मैं हमेशा लोगों के संपर्क में रहता हूं। चाहे मैं विधायक रहा या न रहा। मेरा आज तक कोई पीए भी नहीं रहा। मैं खुद अपने मालिक यानी जनता से डायरेक्ट संपर्क में रहता हूं। उनका फोन उठाता हूं। उनकी समस्याओं को सुनता हूं। मैं विधायक रहूं या न रहूं, मेरे क्षेत्र की जनता मुझे हमेशा एक विधायक के रूप में ही देखती है। आपको पता होगा कि मैं पहली बार 32 हजार वोट लाया था। उसके बाद लगातार 15 हजार, 20 हजार वोट बढ़ता गया। मेरा वोट कभी घटा नहीं। मैं विश्वास के साथ काम करता हूं। देखिये हार-जीत लगी रहती है, लेकिन जनता ने तो मुझे अपार समर्थन दिया।

    सवाल: राजद की बेहतरीन परफॉरमेंस का मूल कारण क्या रहा, आप लोग भाजपा से देवघर छीन लेते हैं, गोड्डा आपके पास है, हुसैनाबाद आपके पास है, विश्रामपुर आपके पास है। जीत का मूल कारण बताइये?
    जवाब: देखिये, हम लोग अपने लोगों से, अपने मालिक से 24 घंटा संपर्क में रहते हैं। उनके साथ हम लोग सुख-दु:ख में साथ रहे। चाहे किसी का एक्सीडेंट हो जाये, चाहे कोई थाना का चक्कर हो, चाहे उनके विकास का कोई मुद्दा हो, चाहे शादी-ब्याह हो, श्राद्ध हो, पूजा-पाठ हो, हम लोग हमेशा उनके साथ रहे और रहते हैं। मैं अगर अपनी बात कहूं तो अगर मैं कहीं उपस्थित नहीं हो पाता तो मेरा बेटा उनके साथ हो लेता है। मैं नहीं हूं तो मेरी पत्नी उनके सुख दु:ख में चली जाती हैं। जो समस्या का निदान मेरा बेटा नहीं कर पाया, तो पत्नी कर देती हैं, अगर वह नहीं कर पातीं तो मैं कर देता हूं। चूंकि मेरा पूरा परिवार पॉलिटिकल परिवार है। आपको पता है कि बिहार में भी मेरे भाई एमएलए हैं। जब से मुखिया का चुनाव हो रहा है, पहले भैया थे, अब भाभी हैं। जिला परिषद में मेरे छोटे भाई की पत्नी हैं, मेरी सरहज गोड्डा जिला की उपाध्यक्ष हैं। मेरी पत्नी अध्यक्ष रह चुकी हैं, उसके बाद वह चुनाव ही नहीं लड़ीं, जनता तो चाह रही थी, लेकिन मैंने ही मना कर दिया। देखिये हम लोग पूरा पॉलिटिकल परिवार हैं। हमें पता है कि जनता को क्या चाहिए। आपको पता होगा, काफी लोग दिखा रहे थे कि अभी जो एमपी का चुनाव हुआ, अगर बांका से मुझे टिकट मिला होता तो आज मैं एमपी होता। मैं तो गोड्डा से भी टिकट मांग रहा था। अगर गोड्डा से भी टिकट मिल जाता तो मैं वहां से भी लड़ता। आप एक चीज जान लीजिए कि हम ही लोग निशिकांत दुबे को मात दे सकते हैं। ठीक है गठबंधन में सीट शेयरिंग के हिसाब से काम हुआ। लेकिन जो कैंडिडेट सामने है, उसको कौन मजबूती से सामना कर सकता है, उससे कौन लड़ सकता है और उसका वोट कौन काट सकता है, जब तक उसका वोट हम नहीं काटते हैं, तब तक वहां जीत नहीं होगी। सब मालिक यानी के ऊपर है।

    सवाल: मंत्री बनने के बाद एक बड़ी रिस्पांसिबिलिटी आपके पास आ गयी है। मंत्री बनने के बाद आप लालू प्रसाद यादव से भी आशीर्वाद लेने गये थे। क्या कहा उन्होने ?
    जवाब: देखिये लालू प्रसाद यादव जी ने तो मुझे बच्चे की तरह खेलाया भी है। विधायक भी बनाया है। तो उनसे बहुत सारी चीजों को हमने सीखा है। आप लगातार देखे होंगे, जिस तरह से झारखंड बिहार में हम कैंप करते हैं, हमारे जो लोग हैं, हमारी जो पहचान है, एक अलग तरीके की है। हमसे किसी को नाराजगी नहीं हो सकती है। मैं पहला व्यक्ति हूं जिसे सभी समुदाय का वोट मिलता है।
    आप लोगों को पता है कि गोड्डा में हमारे मैथिलि समाज का गढ़ है। ब्राह्मण समुदाय का गढ़। उन्होंने भी दिल से मुझे वोट दिया। बहुत ब्राह्मण अफसर, ब्राह्मण नेता बरगलाने के लिए कह रहे थे आरजेडी को क्यों, क्यों आरजेडी का आप लोग पट्टा पहन के घूम रहे हैं। मोतिया जैसा गांव, डुमरिया जैसा गाव, महेशपुर जैसा गांव, सनौर, डरमा, बोदरा, बंदरवाल, लखन पहाड़ी, और आसपास के गांवों में मेरा व्यक्तिगत रिश्ता है। यहां मैंने एक पारिवारिक रिश्ता कायम किया है। मैं विधायक के रूप में काम नहीं करता, मैं भाई बन कर, बेटा बन कर, दोस्त बन कर काम करता हूं। चाहे हमारी मां हों, बहन हों, सारे लोग हमें विधायक के रूप में नहीं देखते हैं। वे मुझे बेटा के रूप में देखते हैं। और सबकी जुबान पर संजय यादव है। यही कमाई है मेरी। यही पूंजी है, यही लालू यादव ने हमें सिखाया है। हमारे नेता तेजस्वी यादव तो बहुत बेहतरीन काम कर रहे हैं। देखिये एक बात तो स्पष्ट है कि हमारी पार्टी ए टू जेड की पार्टी हो गयी है। अब तो ये रहा नहीं कि एमवाई समीकरण, या फलना जो पहले लोग बोलते थे। अब हमारी पार्टी ए तो जेड की पार्टी है। उस हिसाब से हमारी पार्टी काम कर रही है। हम लोग सभी लोगों को लेकर चलेंगे, किसी का अपमान नहीं होने देंगे। उनकी जो भी समस्याएं रहेंगी उसका निदान करेंगे।

    सवाल: तेजस्वी यादव जब से पार्टी की रिस्पांसिबिलिटी संभाले हैं, तो क्या डिफरेंस दिखता है लालू यादव जी के नेतृत्व में और अभी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में? चूंकि तेजस्वी यादव युवा हैं, अलग उत्साह लाये हैं पार्टी में।
    जवाब: देखिये लालू यादव, लालू यादव हैं। लालू यादव हम लोगों के गुरुदेव हैं। हम लोगों ने जो कुछ भी सीखा है, उन्ही से सीखा है। लालू यादव जी बीच-बीच में हमें डायरेक्शन भी देते हैं। वह हमें गाइड करते हैं कि ऐसे करने से यह होगा, वैसे करने से यह होगा। हमें हर तरह का डायरेक्शन उनसे मिलता है। आपको क्या लगता है कि तेजस्वी जी बगैर लालू जी से बिना पूछे कोई काम करते हैं क्या। देखिये लालू जी का जमाना कुछ और अभी का जमाना कुछ और हो गया है। निश्चित रूप से जो नयी चीजें हैं, वह भी साहेब को बतायी जाती है। फिर साहेब उन चीजों का मंथन करते हैं। उसके बाद साहेब तेजस्वी यादव को गाइड करते हैं। लालू यादव जी के डायरेक्शन के बिना एक चीज इधर-उधर नहीं होती। उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा कि हम सत्ता में रहे या न रहें, जनता के बीच में जरूर रहते हैं।

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