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    Home»विशेष»लालू यादव के कुनबे में कलह से बिहार में सियासी माहौल गरम
    विशेष

    लालू यादव के कुनबे में कलह से बिहार में सियासी माहौल गरम

    shivam kumarBy shivam kumarSeptember 26, 2025No Comments7 Mins Read
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    विशेष
    राज्यसभा सांसद संजय यादव को लेकर उठे तूफान में घिरा है पूरा परिवार
    बड़े बेटे के बाद बेटी रोहिणी आचार्य के तेवर से परेशान हैं राजद सुप्रीमो
    तेजस्वी को अभी से सताने लगी है चुनाव मैदान में नुकसान की आशंका

    नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
    बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार सुर्खियों में बना हुआ है। लालू यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य के नाराज हो गयी हैं और उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकांउट से पार्टी, लालू यादव और तेजस्वी यादव को अनफॉलो कर दिया था। कुछ देर के लिए उनका अकाउंट प्राइवेट हो गया था, मगर बाद में उसे फिर पब्लिक किया गया। इससे पहले भी तेज प्रताप यादव परिवार से बगावत कर चुके हैं। उनके विवाहेतर संबंधों को लेकर लालू यादव ने तेज प्रताप को घर और पार्टी से निकाल दिया है। तेज प्रताप ने अब अपनी अलग राह पकड़ ली है और अपने कारनामों से अपने ही परिवार या कहें तेजस्वी की राह में रोड़े खड़े कर रहे हैं। अब रोहिणी आचार्य के बगावती तेवर से राजद सुप्रीमो बेहद परेशान हैं। रोहिणी की नाराजगी राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव हैं, जो इस समय तेजस्वी के सबसे करीबी हैं। संजय यादव की हैसियत कुछ इस तरह की है, जैसे सोनिया गांधी के लिए अहमद पटेल थे या आजकल राहुल गांधी के लिए केसी वेणुगोपाल हैं। संजय पहले परदे के पीछे थे, लेकिन उन्हें पहले तेजस्वी यादव ने अपना राजनीतिक सलाहकार बनाया और फिर 2024 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया, तब वह लालू परिवार और पार्टी के भीतर विलेन की तरह देखे जाने लगे। संजय यादव को लेकर रोहिणी आचार्य ने कई बार निजी तौर पर अपने पिता और भाई से विरोध जताया है, लेकिन उनकी नहीं सुनी गयी। लालू परिवार में रोहिणी को अहम स्थान हासिल है, क्योंकि उन्होंने अपने पिता को अपनी किडनी दी है। अब लालू परिवार के अंदरूनी कलह से बिहार के सियासी माहौल में नये किस्म की सनसनी फैली हुई है। क्या है यह पूरा घटनाक्रम और क्या होगा इसका असर, बता रहे हैं आजाद सिपाही के संपादक राकेश सिंह।

    बिहार में नेता प्रतिपक्ष और राजद सुप्रीमो लालू यादव के उत्तराधिकारी तेजस्वी प्रसाद यादव के सलाहकार संजय यादव के बढ़ते प्रभाव को लेकर राजद के प्रथम परिवार में मतभेद उभर कर सामने आ गये हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा सोशल मीडिया अकाउंट पर संजय यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव को अनफॉलो करने के बाद ये मतभेद सार्वजनिक हो गये हैं। पिछले सप्ताह लालू की सात बेटियों में से दूसरी रोहिणी ने अपने भाई और राज्य में विपक्ष के नेता तेजस्वी की पांच दिवसीय ‘बिहार अधिकार यात्रा’ में संजय यादव की मौजूदगी की आलोचना करते हुए एक पोस्ट (फिर से पोस्ट) की, जो 13 सितंबर को संपन्न हुई। यात्रा में बस की अगली सीट पर बैठे राज्यसभा सांसद संजय यादव की तस्वीर सामने आयी। इसके बाद रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह सीट लालू प्रसाद या तेजस्वी में से किसी एक के लिए है और उनकी अनुपस्थिति में खाली रहनी चाहिए।

    ऐसे शुरू हुआ पूरा विवाद
    यह पूरा विवाद रोहिणी आचार्य द्वारा सोशल मीडिया पर पार्टी समर्थक के एक पोस्ट को दोबारा पोस्ट करने से शुरू हुआ। इसमें लिखा गया था कि आगे की सीट हमेशा शीर्ष नेतृत्व के लिए होती है। नेता के अनुपस्थित होने पर भी किसी को उस पर नहीं बैठना चाहिए। जब कोई शीर्ष नेता से बड़ा होने का बोध रखता हो, तो बात अलग है। हम और बिहार की जनता लालू प्रसाद या तेजस्वी प्रसाद यादव को आगे की सीट पर बैठे देखने की आदी है। हमें किसी और को आगे की सीट पर बैठे देखना बर्दाश्त नहीं है। लेकिन हम उन चाटुकारों पर टिप्पणी नहीं कर सकते, जो किसी व्यक्ति में एक अद्वितीय रणनीतिकार, सलाहकार और रक्षक देखते हैं।

    मची खलबली, तो रोहिणी का डैमेज कंट्रोल
    रोहिणी द्वारा आलोचना को दोबारा पोस्ट करने से पार्टी के प्रथम परिवार में खलबली मच गयी। संजय यादव पर परोक्ष रूप से निशाना साधने के लिए उन्हें परिवार की आलोचना का सामना करना पड़ा। उन पर डैमेज कंट्रोल का दबाव था। पार्टी ने संजय यादव को लेकर परिवार में मतभेदों को कम करने की कोशिश की और दलित नेताओं शिवचंद्र राम और रेखा पासवान को यात्रा में आगे की सीट पर बिठाया। इससे रोहिणी को एक सुरक्षा कवच मिला और उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, लालू प्रसाद के सामाजिक-आर्थिक न्याय अभियान का मुख्य उद्देश्य वंचितों और सामाजिक स्तर के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को आगे लाना रहा है। इन तस्वीरों में इन वर्गों के लोगों को आगे की सीट पर बैठे देखना उत्साहजनक है।

    रोहिणी आचार्य की मंशा
    रोहिणी ने अपनी बड़ी बहन मीसा भारती की तरह मेडिकल की डिग्री हासिल की है और 2022 में तब सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने अपने पिता को किडनी दान की। यह सर्जरी सिंगापुर के एक अस्पताल में हुई थी। पटना लौटने के बाद लालू प्रसाद यादव ने अपनी बेटी की खूब तारीफ की। रोहिणी ने पिछले साल सारण से लोकसभा चुनाव लड़ा था और मौजूदा भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी से मामूली अंतर से हार गयी थीं। अपनी कथित राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर आॅनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होने के बीच उन्होंने सिंगापुर के एक अस्पताल के आॅपरेशन थियेटर में ले जाये जाने का 2022 का एक वीडियो पोस्ट करके अपनी स्थिति का संकेत दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने लालू और तेजस्वी समेत कई लोगों को अनफॉलो कर दिया। फिलहाल, वह सिर्फ तीन एक्स अकाउंट को फॉलो करती हैं: उनके पति समरेश सिंह, उर्दू शायर राहत इंदौरी और एक अखबार।

    रोहिणी आचार्य का करारा प्रहार
    विवाद शांत होने की बजाय और बढ़ गया, जब रोहिणी ने एक्स पर पोस्ट कर उन लोगों पर निशाना साधा, जिनका ‘पार्टी को हाइजैक करने का गुप्त उद्देश्य’ है। उन्होंने लिखा कि मेरे बारे में फैलायी जा रही सभी अफवाहें निराधार हैं और मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से चलाये जा रहे एक दुर्भावनापूर्ण अभियान का हिस्सा हैं, जिसे ट्रोल, उपद्रवी व्यक्तियों, पेड मीडिया और पार्टी को हाइजैक करने के गुप्त इरादे रखने वाले लोग हवा दे रहे हैं। मेरी न कभी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही है, न है और न ही होगी। मैं न तो खुद विधानसभा उम्मीदवार बनने की ख्वाहिश रखती हूं और न ही किसी और को उम्मीदवार बनाना चाहती हूं। मुझे राज्यसभा सदस्य बनने की कोई इच्छा नहीं है, न ही मेरे परिवार के किसी सदस्य से कोई प्रतिद्वंद्विता है। मुझे पार्टी या भविष्य की किसी सरकार में किसी पद का लालच नहीं है। मेरे लिए मेरा आत्म-सम्मान, मेरे माता-पिता के प्रति सम्मान और समर्पण, और मेरे परिवार की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है।

    विलेन बने संजय यादव
    हालांकि परिवार से किसी ने भी मौजूदा विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके भाई और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव, जो परिवार से अलग-थलग हैं, ने कहा कि मेरी बहन ने बहुत ही जायज सवाल उठाये हैं। उनकी चिंताएं (संजय यादव के बढ़ते प्रभाव को लेकर) हैं। तेज प्रताप ने भी संजय यादव के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जतायी है, हालांकि उन्होंने उनका नाम नहीं लिया। 2024 में राज्यसभा सांसद बनने वाले संजय यादव हरियाणा से हैं और 2012 में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तेजस्वी से उनका परिचय कराया था । तेजस्वी को उनके राजनीतिक पदार्पण के लिए तैयार करने, उन्हें समाजवादी साहित्य से परिचित कराने और मीडिया के सामने उनके नकली साक्षात्कार आयोजित करने में संजय की महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि 2020 तक राजद के सत्ता ढांचे में संजय और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा समान रूप से महत्वपूर्ण थे, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में संजय झा पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं पर हावी होते दिख रहे हैं और तेजस्वी की लगभग सभी बैठकें और मीडिया बातचीत उनके माध्यम से ही होती हैं।

    लालू-तेजस्वी के सामने चुनौती
    रोहिणी आचार्य के तेवर ने लालू यादव और तेजस्वी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। दोनों को अभी से ही इसके सियासी नुकसान की आशंका दिखाई देने लगी है। तेजस्वी यादव सार्वजनिक रूप से तो हंसते-मुस्कुराते नजर आ रहे हैं, लेकिन घर लौटने के बाद वह गुमसुम रहने लगे हैं। मीडिया के सामने भी वह बहुत ज्यादा नहीं खुल रहे हैं। खराब स्वास्थ्य के बावजूद चुटीले बयानों के लिए मशहूर लालू यादव भी बेटी के रुख से परेशान हैं। ऐसे में बिहार का सियासी माहौल नया करवट लेता दिखाई देने लगा है।

     

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    shivam kumar

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